राजनाथ सिंह एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने किर्गिस्तान जाएंगे
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 27–28 अप्रैल को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक की यात्रा पर जाएंगे, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह उच्चस्तरीय बैठक यूरेशिया और एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, आतंकवाद और उग्रवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित होगी। भारत के लिए यह मंच सामरिक संवाद और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
भारत की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, जिसमें एससीओ के सभी सदस्य देशों के रक्षा मंत्री शामिल होंगे। यह मंच सदस्य देशों के बीच रणनीतिक संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति में अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है।
भारत इस बैठक में क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने की संभावना रखता है। भारत का उद्देश्य केवल सुरक्षा सहयोग बढ़ाना नहीं, बल्कि संतुलित और स्थायी क्षेत्रीय व्यवस्था को भी बढ़ावा देना है।
आतंकवाद और उग्रवाद रहेगा मुख्य एजेंडा
बैठक का एक प्रमुख विषय आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई होगा। सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ और क्षेत्रीय अस्थिरता एससीओ के कई सदस्य देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।
भारत लगातार बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा है। इस बैठक में भी भारत खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ समन्वित कार्रवाई पर जोर दे सकता है। भारत की नीति स्पष्ट रूप से आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता पर आधारित है।
बदलते भू-राजनीतिक हालात का प्रभाव
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव, रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य एशिया में बदलते शक्ति संतुलन ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित किया है। इन परिस्थितियों ने एससीओ के भीतर रक्षा सहयोग के महत्व को और बढ़ा दिया है।
भारत इस मंच पर रणनीतिक संतुलन, संप्रभुता के सम्मान और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर बल देने की संभावना रखता है। साथ ही, भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के दृष्टिकोण को बनाए रखते हुए सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलित संबंधों पर भी जोर देगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी और यह राजनीतिक, आर्थिक तथा सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित है।
- भारत और पाकिस्तान वर्ष 2017 में एससीओ के पूर्ण सदस्य बने थे।
- एससीओ में चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान और कई मध्य एशियाई देश शामिल हैं।
- बिश्केक किर्गिस्तान की राजधानी है और कई प्रमुख क्षेत्रीय कूटनीतिक बैठकों की मेजबानी कर चुका है।
भारत एससीओ को मध्य एशिया के साथ जुड़ाव और साझा सुरक्षा चिंताओं के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच मानता है। ऐसी बैठकों में भागीदारी भारत की रक्षा कूटनीति को मजबूत करती है और क्षेत्र में उसकी रणनीतिक उपस्थिति को विस्तार देती है। राजनाथ सिंह की यह यात्रा नई दिल्ली के उस प्रयास को भी दर्शाती है, जिसमें भारत क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखना चाहता है।