नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष बन सकते हैं अशोक लाहिड़ी, बड़े बदलाव के संकेत
केंद्र सरकार पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का नया उपाध्यक्ष नियुक्त करने की तैयारी में है। वे वर्तमान उपाध्यक्ष सुमन बेरी का स्थान लेंगे। इसके साथ ही भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल के निदेशक गोबर्धन दास को भी नीति आयोग के सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने की संभावना है। ये नियुक्तियां पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान हो रही हैं, इसलिए इन्हें राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बदलाव नीति आयोग के व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है।
अशोक लाहिड़ी की नीति नेतृत्व में वापसी
अशोक लाहिड़ी वर्तमान में पश्चिम बंगाल के बालूरघाट से भाजपा विधायक हैं और 2026 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं हैं। उनका शैक्षणिक और प्रशासनिक जीवन काफी समृद्ध रहा है। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अध्यापन किया और विश्व बैंक तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे वैश्विक संस्थानों के साथ कार्य किया।
1990 के दशक के अंत में वे भारत के वित्त मंत्रालय से जुड़े और बाद में राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (NIPFP) के प्रमुख बने। इसके बाद उन्होंने भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी नियुक्ति से नीति आयोग को मजबूत आर्थिक दृष्टिकोण मिलने की उम्मीद है।
गोबर्धन दास भी बन सकते हैं सदस्य
गोबर्धन दास, जो पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुके हैं, को भी नीति आयोग में सदस्य के रूप में शामिल किए जाने की संभावना है। वे IISER भोपाल के निदेशक हैं और विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में उनकी मजबूत पहचान है।
उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पूर्वस्थली उत्तर सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़ा था। एक दलित नेता के रूप में उनकी सामाजिक और राजनीतिक पहचान महत्वपूर्ण मानी जाती है। चुनाव के बाद बंगाल में हिंसा का सामना करने की खबरों के कारण उनकी नियुक्ति को सामाजिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
नीति आयोग के व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा
इन नियुक्तियों को नीति आयोग में लंबे समय से प्रतीक्षित पुनर्गठन के रूप में देखा जा रहा है। सुमन बेरी पिछले चार वर्षों से उपाध्यक्ष के पद पर थे, लेकिन कई मौकों पर केंद्र सरकार सीधे सदस्यों और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के साथ काम करती दिखाई दी।
हाल ही में सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम के पद छोड़ने के बाद यह पद भी परिवर्तन के दौर में है। ऐसे में अशोक लाहिड़ी की नियुक्ति से नीति आयोग की संस्थागत नीति दिशा और निर्णय प्रक्रिया को नई मजबूती मिलने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर की गई थी।
- नीति आयोग के उपाध्यक्ष की नियुक्ति भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।
- अशोक लाहिड़ी भारत के 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं।
- IISER भोपाल भारत के प्रमुख स्वायत्त विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में से एक है।
अशोक लाहिड़ी केवल अर्थशास्त्री ही नहीं, बल्कि भारत में चुनाव अध्ययन के अग्रणी विद्वानों में भी गिने जाते हैं। उन्होंने “इंडिया डिसाइड्स” नामक पुस्तक का सह-लेखन किया, जिसमें 1952 से 1989 तक के भारतीय चुनावों का विश्लेषण किया गया है। उनकी आर्थिक समझ और राजनीतिक दृष्टि नीति आयोग की भविष्य की नीति निर्माण प्रक्रिया को नया स्वरूप दे सकती है। वहीं, पश्चिम बंगाल चुनावों के दौरान लाहिड़ी और दास की एक साथ नियुक्ति को भाजपा के राज्य में राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।