रवि अग्रवाल को सीबीडीटी अध्यक्ष के रूप में छह माह का सेवा विस्तार
भारत सरकार ने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 1988 बैच के अधिकारी रवि अग्रवाल को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष पद पर पुनर्नियुक्त करते हुए छह माह का सेवा विस्तार प्रदान किया है। यह नियुक्ति 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक अथवा अगले आदेश तक संविदा के आधार पर प्रभावी रहेगी। इस निर्णय का उद्देश्य प्रत्यक्ष कर प्रशासन में नीति निर्माण और कार्यान्वयन की निरंतरता बनाए रखना है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड क्या है?
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) भारत में प्रत्यक्ष करों से संबंधित सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था है। यह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करता है और आयकर अधिनियम, 1961 के प्रशासन, कर संग्रह, कर नीति निर्माण तथा कर प्रवर्तन से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी निभाता है। सीबीडीटी देश की प्रत्यक्ष कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और करदाताओं के अनुकूल बनाने के लिए समय-समय पर नई नीतियाँ और सुधार लागू करता है। आयकर प्रशासन के आधुनिकीकरण तथा डिजिटल कर प्रणाली को मजबूत बनाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
सेवा विस्तार और नियुक्ति प्रक्रिया
रवि अग्रवाल 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने उनकी सेवाओं का अनुभव और प्रशासनिक विशेषज्ञता देखते हुए उन्हें छह माह के लिए पुनर्नियुक्त करने का निर्णय लिया। यह नियुक्ति केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) की स्वीकृति के बाद भर्ती नियमों में शिथिलता प्रदान करते हुए की गई है। यह सेवा विस्तार पुनर्नियोजित केंद्रीय सरकारी अधिकारियों पर लागू शर्तों के अनुसार संविदा के आधार पर दिया गया है, जिससे सीबीडीटी के कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी।
रवि अग्रवाल का कार्यकाल
रवि अग्रवाल को पहली बार जून 2024 में एक वर्ष के लिए सीबीडीटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। बाद में उनके कार्यकाल को एक और वर्ष के लिए बढ़ाकर जून 2026 तक कर दिया गया। अब सरकार ने उन्हें पुनः छह माह का विस्तार देकर कर प्रशासन में उनके अनुभव का लाभ उठाने का निर्णय लिया है। उनके नेतृत्व में प्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधार, डिजिटल कर प्रशासन को बढ़ावा तथा कर संग्रह को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें आगे बढ़ाई गई हैं।
प्रत्यक्ष कर संग्रह की स्थिति
भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह लगातार मजबूत बना हुआ है। 17 जून 2026 तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 5.21 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14.64 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि बेहतर कर अनुपालन, डिजिटल निगरानी और कर प्रशासन की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करने वाली सर्वोच्च प्रत्यक्ष कर नीति-निर्माण संस्था है।
- सीबीडीटी आयकर अधिनियम, 1961 के प्रशासन, कर संग्रह और प्रत्यक्ष कर नीति निर्माण का दायित्व निभाता है।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) केंद्र सरकार में वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति और सेवा विस्तार को मंजूरी देती है।
- रवि अग्रवाल भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 1988 बैच के अधिकारी हैं और जून 2024 से सीबीडीटी के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
रवि अग्रवाल को दिया गया यह सेवा विस्तार सरकार के प्रत्यक्ष कर प्रशासन में स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने के प्रयासों को दर्शाता है। मजबूत कर संग्रह, डिजिटल प्रशासन और प्रभावी नीति निर्माण के बीच उनका अनुभव आने वाले महीनों में भी कर व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।