आरबीआई ने रवि शंकर को बनाया नया कार्यकारी निदेशक
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 1 जुलाई 2026 से रवि शंकर को कार्यकारी निदेशक (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर) नियुक्त किया है। इससे पहले वे आरबीआई के सांख्यिकी एवं सूचना प्रबंधन विभाग (डीएसआईएम) में सलाहकार-प्रभारी के रूप में कार्यरत थे। नई जिम्मेदारी संभालने के बाद भी वे इसी विभाग का नेतृत्व करते रहेंगे। यह नियुक्ति आरबीआई के वरिष्ठ प्रबंधन ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कार्यकारी निदेशक का महत्व
आरबीआई में कार्यकारी निदेशक एक वरिष्ठ प्रबंधन पद होता है। बैंक में कई कार्यकारी निदेशक विभिन्न प्रमुख विभागों का नेतृत्व करते हैं। इनमें बैंकिंग विनियमन, भुगतान एवं निपटान प्रणाली, सांख्यिकी, मौद्रिक नीति से जुड़े सहायता कार्य और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक विभाग शामिल हैं। इन अधिकारियों की भूमिका नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और संस्थागत निर्णयों में बेहद अहम होती है।
डीएसआईएम विभाग की भूमिका
सांख्यिकी एवं सूचना प्रबंधन विभाग (डीएसआईएम) आरबीआई का एक प्रमुख डेटा और अनुसंधान विभाग है। यह विभाग बैंकिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र से संबंधित सांख्यिकीय आंकड़ों का संग्रह, संकलन और विश्लेषण करता है। इसके अलावा विभिन्न आर्थिक सर्वेक्षणों का संचालन, वित्तीय आंकड़ों का अध्ययन तथा मौद्रिक और वित्तीय नीतियों के लिए आवश्यक डेटा उपलब्ध कराना भी इसी विभाग की जिम्मेदारी है। देश की आर्थिक स्थिति के आकलन में इस विभाग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
रवि शंकर का करियर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
रवि शंकर एक अनुभवी केंद्रीय बैंकर और सांख्यिकीविद् हैं, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक में तीन दशकों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कॉरपोरेट एवं बैंकिंग सांख्यिकी, सरकारी प्रतिभूति बाजार, निपटान प्रणाली, ऋण प्रबंधन तथा विभिन्न आर्थिक सर्वेक्षणों जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सांख्यिकी में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की है। साथ ही, दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ से विकास नीति एवं नियोजन में डिप्लोमा भी हासिल किया है। उनकी शैक्षणिक योग्यता और व्यापक अनुभव उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त बनाते हैं।
हाल की आरबीआई नियुक्तियां
पिछले दो महीनों में यह आरबीआई में कार्यकारी निदेशक स्तर की दूसरी प्रमुख नियुक्ति है। इससे पहले 18 मई 2026 को गुनवीर सिंह को भुगतान एवं निपटान प्रणाली विभाग का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया था। लगातार हो रही ये नियुक्तियां आरबीआई के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत हुई थी।
- आरबीआई भारत का केंद्रीय बैंक है और एक रुपये के नोट तथा सिक्कों को छोड़कर सभी मुद्रा नोट जारी करता है। एक रुपये के नोट और सिक्के भारत सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं।
- सांख्यिकी एवं सूचना प्रबंधन विभाग (डीएसआईएम) आरबीआई का प्रमुख डेटा, अनुसंधान और सांख्यिकीय विश्लेषण विभाग है।
- कार्यकारी निदेशक आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल होते हैं और विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों के संचालन एवं नीति क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभाते हैं।
रवि शंकर की कार्यकारी निदेशक के रूप में नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय है। सांख्यिकी, वित्तीय विश्लेषण और नीति निर्माण से जुड़े उनके व्यापक अनुभव से आरबीआई के डेटा प्रबंधन और अनुसंधान कार्यों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह नियुक्ति देश की वित्तीय प्रणाली को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।