कोयला ब्लॉक आवंटियों को इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड की अनुमति, बैंक गारंटी का मिलेगा विकल्प

कोयला ब्लॉक आवंटियों को इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड की अनुमति, बैंक गारंटी का मिलेगा विकल्प

देश में वाणिज्यिक कोयला खनन को बढ़ावा देने और परियोजनाओं के लिए पूंजी की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से कोयला मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब कोयला ब्लॉक आवंटियों को परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (Performance Bank Guarantee) के स्थान पर इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड (Insurance Surety Bond) का उपयोग करने की अनुमति दी गई है। यह व्यवस्था खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों पर लागू होगी। इस संबंध में कोल ब्लॉक्स एलोकेशन (संशोधन) नियम, 2026 को 22 जून 2026 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया।

क्या है इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड?

इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड एक वित्तीय साधन है, जिसे किसी बीमा कंपनी द्वारा जारी किया जाता है। इसका उद्देश्य किसी परियोजना या अनुबंध में प्रदर्शन अथवा भुगतान की गारंटी प्रदान करना होता है। यदि संबंधित पक्ष अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियों का पालन करने में विफल रहता है, तो बॉन्ड की शर्तों के अनुसार दायित्व पूरा किया जाता है। भारत में इसका उपयोग पहले से ही अवसंरचना, निर्माण और खनन क्षेत्रों की कई परियोजनाओं में बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में किया जा रहा है।

कोयला ब्लॉक आवंटन नियमों में क्या बदलाव हुआ?

संशोधित नियमों के अनुसार, खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों के मौजूदा आवंटी, निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए पहले से जमा की गई परफॉर्मेंस बैंक गारंटी को इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड से बदल सकते हैं। इससे परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था बनी रहेगी, जबकि कंपनियों को अपनी कार्यशील पूंजी का अधिक प्रभावी उपयोग करने का अवसर मिलेगा।

प्रदर्शन सुरक्षा और वित्तीय लाभ

खनन तथा अवसंरचना परियोजनाओं में परफॉर्मेंस बैंक गारंटी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि परियोजना निर्धारित शर्तों के अनुसार पूरी हो। नई व्यवस्था में प्रदर्शन सुरक्षा की अनिवार्यता बनी रहेगी, लेकिन बैंक गारंटी के स्थान पर इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड स्वीकार किए जाएंगे। इससे कंपनियों पर बैंकिंग संसाधनों का दबाव कम होगा और वे अपनी पूंजी का उपयोग खदान विकास, उपकरणों की खरीद तथा परिचालन गतिविधियों में अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगी।

वाणिज्यिक कोयला खनन को मिलेगा प्रोत्साहन

कोयला मंत्रालय का मानना है कि यह कदम भारत में वाणिज्यिक कोयला खनन को गति देगा और क्षेत्र से जुड़े निवेशकों तथा कंपनियों को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करेगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में यह सुविधा कोल माइंस (स्पेशल प्रोविज़न्स) अधिनियम, 2015 के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों तक भी विस्तारित की जाएगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 भारत में खनिजों के विनियमन और खनन विकास से संबंधित प्रमुख कानून है।
  • कोल माइंस (स्पेशल प्रोविज़न्स) अधिनियम, 2015 कुछ विशेष कोयला खदानों के आवंटन और विनियमन से संबंधित प्रावधान करता है।
  • बैंक गारंटी में बैंक यह आश्वासन देता है कि आवेदक के दायित्व पूरा न करने पर वह लाभार्थी को भुगतान करेगा।
  • इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड एक त्रिपक्षीय व्यवस्था होती है, जिसमें बीमाकर्ता, दायित्व निभाने वाला पक्ष (प्रिंसिपल) और लाभार्थी (ऑब्लाइजी) शामिल होते हैं।

कोयला मंत्रालय का यह निर्णय खनन क्षेत्र में वित्तीय प्रक्रियाओं को अधिक लचीला और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे परियोजनाओं के लिए पूंजी की उपलब्धता बढ़ेगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और भारत के वाणिज्यिक कोयला खनन क्षेत्र को नई गति मिलने की संभावना है।

Originally written on July 3, 2026 and last modified on July 3, 2026.

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