यूरोपीय संघ की संशोधित सूची में भारत को मिली जगह
भारत को यूरोपीय संघ द्वारा 12 मई 2026 को जारी संशोधित मसौदा सूची में शामिल किया गया है, जिससे भारतीय एक्वाकल्चर उत्पादों के निर्यात को सितंबर 2026 के बाद भी जारी रखने का मार्ग खुल गया है। यह फैसला भारत के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यूरोपीय संघ भारत के प्रमुख निर्यात बाजारों में से एक है।
यूरोपीय संघ के नए नियम
यूरोपीय आयोग के डेलीगेटेड रेगुलेशन (EU) 2023/905 के अनुसार, यूरोपीय संघ को निर्यात किए जाने वाले पशु और पशु-आधारित खाद्य उत्पादों में ऐसे एंटीमाइक्रोबियल औषधियों का उपयोग नहीं होना चाहिए जो वृद्धि बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। यह नियम उन एंटीमाइक्रोबियल दवाओं पर भी लागू होता है जिन्हें मानव उपचार के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और एंटीबायोटिक प्रतिरोध के खतरे को कम करना है।
भारत की पहले हुई थी अनदेखी
भारत को 4 अक्टूबर 2024 को जारी यूरोपीय संघ के कार्यान्वयन विनियमन (EU) 2024/2598 में शामिल नहीं किया गया था। उस समय भारत को सितंबर 2026 के बाद मानव उपभोग के लिए पशु-आधारित उत्पादों के निर्यात की अनुमति नहीं दी गई थी। इससे भारतीय समुद्री खाद्य उद्योग में चिंता बढ़ गई थी, क्योंकि यूरोपीय बाजार भारतीय जलीय कृषि उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य माना जाता है।
समुद्री खाद्य निर्यात में यूरोप का महत्व
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यूरोपीय संघ भारत का तीसरा सबसे बड़ा समुद्री खाद्य निर्यात बाजार रहा। भारत के कुल समुद्री खाद्य निर्यात मूल्य में यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी लगभग 18.94 प्रतिशत रही, जिसका मूल्य करीब 1.593 अरब अमेरिकी डॉलर था। इन निर्यातों में फार्म में पाले गए झींगे यानी फार्म्ड श्रिम्प का बड़ा योगदान रहा। भारतीय समुद्री उद्योग के लिए यह बाजार विदेशी मुद्रा आय और रोजगार दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
अनुपालन और संस्थागत भूमिका
भारत के वाणिज्य विभाग, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण और एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल ने यूरोपीय संघ के नियमों के अनुरूप गुणवत्ता नियंत्रण और जिम्मेदार जलीय कृषि पद्धतियों को सुनिश्चित करने के लिए कार्य किया। अब संशोधित नियम को यूरोपीय आयोग द्वारा औपचारिक रूप से अपनाया जाना अगला महत्वपूर्ण चरण होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूरोपीय संघ में कुल 27 सदस्य देश शामिल हैं।
- समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाली वैधानिक संस्था है।
- एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल भारत की आधिकारिक गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण एजेंसी है।
- एक्वाकल्चर का अर्थ मछली, झींगा, शैवाल और अन्य जलीय जीवों की खेती करना है।
भारत को यूरोपीय संघ की संशोधित सूची में शामिल किया जाना देश के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे भारतीय एक्वाकल्चर उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता और नए अवसर मिलने की संभावना है।