पीएफएएस रसायनों की मौजूदगी पर अमेरिकी अध्ययन ने बढ़ाई चिंता

पीएफएएस रसायनों की मौजूदगी पर अमेरिकी अध्ययन ने बढ़ाई चिंता

पर- और पॉलीफ्लुओरोएल्किल पदार्थ यानी पीएफएएस को लेकर हाल ही में प्रकाशित एक अमेरिकी अध्ययन ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। अप्रैल 2026 में जर्नल ऑफ ऑक्यूपेशनल एंड एनवायरनमेंटल हाइजीन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 10,566 मानव रक्त नमूनों में से 98.8 प्रतिशत में पीएफएएस रसायनों की मौजूदगी पाई गई। ये रसायन पर्यावरण और मानव शरीर में लंबे समय तक बने रहते हैं, इसलिए इन्हें “फॉरएवर केमिकल्स” भी कहा जाता है।

पीएफएएस क्या हैं

पीएफएएस लगभग 15,000 से अधिक सिंथेटिक रसायनों का समूह है, जिनका उपयोग औद्योगिक और उपभोक्ता उत्पादों में किया जाता है। इन रसायनों में कार्बन और फ्लोरीन के बीच अत्यंत मजबूत बंधन होता है, जो इन्हें गर्मी, पानी, तेल और दागों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी बनाता है। पीएफएचएक्सएस यानी परफ्लुओरोहेक्सेन सल्फोनिक एसिड पीएफएएस का एक प्रमुख प्रकार है, जिसका उपयोग कपड़ों, फर्नीचर और चिपकाने वाले पदार्थों में किया जाता है।

अध्ययन में क्या सामने आया

अध्ययन में लोगों के सीरम और प्लाज्मा नमूनों की जांच की गई। परिणामों में पाया गया कि 98.5 प्रतिशत नमूनों में एक से अधिक प्रकार के पीएफएएस रसायन मौजूद थे। केवल 0.18 प्रतिशत नमूनों में एक ही प्रकार का पीएफएएस पाया गया। शोधकर्ताओं ने 70 से अधिक अलग-अलग पीएफएएस संयोजनों की पहचान की। पीएफएचएक्सएस नामक रसायन 97.9 प्रतिशत नमूनों में मिला, जो इसकी व्यापक मौजूदगी को दर्शाता है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

पीएफएएस के संपर्क में लोग दूषित पानी, खाद्य पैकेजिंग, घरेलू उत्पादों और कार्यस्थलों के माध्यम से आते हैं। पूर्व शोधों में कुछ पीएफएएस रसायनों को किडनी कैंसर, वृषण कैंसर, यकृत क्षति, प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी तथा प्रजनन और विकास संबंधी समस्याओं से जोड़ा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन रसायनों के लंबे समय तक शरीर में बने रहने के कारण इनके प्रभाव गंभीर हो सकते हैं।

बायोमॉनिटरिंग और रासायनिक मिश्रण अध्ययन

बायोमॉनिटरिंग अध्ययन मानव ऊतकों और शारीरिक द्रवों में रसायनों की उपस्थिति को मापने के लिए किए जाते हैं। जब कई रसायन एक साथ मौजूद हों, तब उनके संयुक्त प्रभावों को समझने के लिए केमिकल मिक्सचर असेसमेंट का उपयोग किया जाता है। इन प्रभावों में कुछ रसायन एक-दूसरे के असर को बढ़ा सकते हैं, घटा सकते हैं या अलग तरीके से प्रभावित कर सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • PFAS का पूरा नाम पर- और पॉलीफ्लुओरोएल्किल सब्सटेंस है।
  • पीएफएएस को “फॉरएवर केमिकल्स” कहा जाता है क्योंकि ये लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं।
  • PFHxS अध्ययन में पाया गया प्रमुख पीएफएएस रसायन था।
  • सीरम और प्लाज्मा रक्त के वे घटक हैं जिनका उपयोग बायोमॉनिटरिंग अध्ययनों में किया जाता है।

यह अध्ययन दर्शाता है कि आधुनिक जीवन में उपयोग होने वाले कई रसायन मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। आने वाले समय में पीएफएएस के उपयोग, नियंत्रण और सुरक्षित विकल्पों पर वैश्विक स्तर पर और अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना है।

Originally written on May 15, 2026 and last modified on May 15, 2026.

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