आईएमडी ने लॉन्च किए एआई आधारित मौसम पूर्वानुमान उत्पाद

आईएमडी ने लॉन्च किए एआई आधारित मौसम पूर्वानुमान उत्पाद

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मानसून और वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों के लिए दो नई कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मौसम पूर्वानुमान सेवाएं शुरू की हैं। इन प्रणालियों का उद्देश्य किसानों, जल संसाधन प्रबंधन एजेंसियों और आपदा प्रबंधन तंत्र को अधिक सटीक और समयबद्ध जानकारी उपलब्ध कराना है। एक उत्पाद राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए विकसित किया गया है, जबकि दूसरा पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान द्वारा जिला स्तर की वर्षा निगरानी के लिए तैयार किया गया है।

एआई आधारित वर्षा पूर्वानुमान प्रणाली

उत्तर प्रदेश के लिए विकसित नई प्रणाली 1 किलोमीटर के स्थानिक रिजॉल्यूशन पर वर्षा का पूर्वानुमान देने में सक्षम है। यह प्रणाली ऑटोमैटिक रेन गेज, ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, उपग्रह और डॉप्लर मौसम रडार से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करती है। इस तकनीक के माध्यम से 10 दिन पहले तक सूक्ष्म स्तर पर वर्षा का अनुमान लगाया जा सकता है। इससे किसानों को बुवाई, सिंचाई और फसल सुरक्षा संबंधी निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।

जिला स्तर पर मानसून ट्रैकिंग

आईआईटीएम द्वारा विकसित दूसरी प्रणाली मानसून की प्रगति को जिला स्तर पर ट्रैक करती है। यह हर बुधवार को अपडेट जारी करती है और वर्तमान चरण में 16 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 3,196 ब्लॉकों और उप-जिलों को कवर कर रही है। इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यहां की कृषि मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर है और मानसून की स्थिति सीधे कृषि उत्पादन को प्रभावित करती है।

कृषि और आपदा प्रबंधन में उपयोग

नई मौसम पूर्वानुमान प्रणालियां कृषि, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। किसान इन पूर्वानुमानों का उपयोग बुवाई, सिंचाई, फसल संरक्षण और कटाई की योजना बनाने में कर सकते हैं। सटीक मौसम जानकारी से सूखा, अत्यधिक वर्षा और अन्य मौसम संबंधी जोखिमों से होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

संस्थागत ढांचा

भारत मौसम विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र, दोनों पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करते हैं। ये संस्थान आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान क्षमता को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं। भारत में 750 से अधिक जिले हैं, जबकि वर्तमान चरण में केवल चयनित वर्षा आधारित क्षेत्रों को इस नई प्रणाली के अंतर्गत शामिल किया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना वर्ष 1875 में हुई थी।
  • राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमैटिक रेन गेज जमीन आधारित मौसम निगरानी उपकरण हैं।
  • डॉप्लर मौसम रडार का उपयोग वर्षा और तूफानी प्रणालियों की निगरानी के लिए किया जाता है।

एआई आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रणाली भारत में कृषि और मौसम विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति मानी जा रही है। इससे किसानों को अधिक सटीक जानकारी मिलने के साथ-साथ आपदा जोखिम कम करने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी सहायता मिल सकती है।

Originally written on May 15, 2026 and last modified on May 15, 2026.

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