यूपी में महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश नियम और उदार हुआ
उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने 180 दिन के सवेतन मातृत्व अवकाश को सेवा काल में दो बार देने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही दत्तक माताओं को भी 180 दिन का वही लाभ मिलेगा। यह निर्णय राज्य सेवा नियमों में बदलाव के जरिए लागू किया जाएगा और इसे महिला कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्या बदला और किसे मिलेगा लाभ
अब तक राज्य सेवा नियमों में पहली और दूसरी मातृत्व छुट्टी के बीच कम से कम दो साल के अंतर की शर्त थी। कैबिनेट ने इस प्रावधान को हटाने के लिए उत्तर प्रदेश वित्तीय हस्तपुस्तिका, खंड-2, भाग 2 से 4 के नियम 153(1) में संशोधन को मंजूरी दी है। इसका सीधा असर उन महिला कर्मचारियों पर पड़ेगा जिन्हें सेवा अवधि में दो बार मातृत्व अवकाश की जरूरत पड़ सकती है।
दत्तक माताओं को भी 180 दिन का अवकाश देने का फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इससे मातृत्व से जुड़े अधिकारों का दायरा और व्यापक हुआ है। सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं के लिए यह व्यवस्था कार्यस्थल पर सुरक्षा और संवेदनशीलता दोनों को बढ़ाती है।
अदालतों के फैसलों के बाद आया निर्णय
यह कैबिनेट फैसला लखनऊ खंडपीठ के 14 अगस्त 2026 और इलाहाबाद हाईकोर्ट की इलाहाबाद खंडपीठ के 28 जुलाई 2026 के निर्णयों के बाद आया है। इन फैसलों में कहा गया था कि राज्य के कार्यकारी नियम मातृत्व लाभ से जुड़े केंद्रीय कानूनों, यानी मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020, को पीछे नहीं कर सकते।
इसी कानूनी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने अपने नियमों को केंद्रीय प्रावधानों के अनुरूप करने का रास्ता चुना है। इससे भविष्य में सेवा नियमों और मातृत्व अधिकारों के बीच टकराव की स्थिति कम होने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 भारत में मातृत्व अवकाश और संबंधित लाभों को नियंत्रित करने वाला केंद्रीय कानून है।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 संसद द्वारा पारित चार श्रम संहिताओं में से एक है।
- दत्तक माताओं को भी भारतीय श्रम कानूनों में मातृत्व-संबंधी लाभों के दायरे में रखा गया है।
- उत्तर प्रदेश के इस फैसले में वित्तीय हस्तपुस्तिका, खंड-2 के नियम 153(1) में संशोधन किया गया है।
कैबिनेट की अन्य मंजूरियां
22 अगस्त 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव अन्य 10 राज्य प्रस्तावों के साथ कैबिनेट बाय सर्कुलेशन के जरिए मंजूर किया गया। इसी बैठक में बंद पड़ी चीनी मिलों की जमीन को उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित करने पर स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क में छूट देने का फैसला भी लिया गया।
इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में हर घर तिरंगा अभियान 2026 के लिए एक करोड़ झंडों के उत्पादन हेतु राज्य वित्त आयोग की निधि को भी मंजूरी दी गई। कुल मिलाकर, यह बैठक प्रशासनिक, सामाजिक और प्रतीकात्मक—तीनों स्तरों पर कई फैसलों के लिए महत्वपूर्ण रही।