मिशन रंगीन मछली 2031 से ऑर्नामेंटल फिशरीज को नई दिशा
भारत में ऑर्नामेंटल फिशरीज यानी एक्वेरियम और सजावटी मछलियों के उत्पादन, पालन और व्यापार को संगठित रूप देने के लिए ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ नाम से एक रणनीतिक कार्ययोजना जारी की गई है। 31 अगस्त 2026 को लक्षद्वीप के अगत्ती में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने इस योजना का अनावरण किया। यह पहल वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और नियामकीय अनुपालन पर केंद्रित है, ताकि इस क्षेत्र को अधिक मानकीकृत और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
ऑर्नामेंटल फिशरीज क्यों अहम है
ऑर्नामेंटल फिशरीज का संबंध उन मछलियों से है जिन्हें मुख्यतः एक्वेरियम, सजावट और शौकिया पालन के लिए पाला जाता है। इस क्षेत्र में ब्रूडस्टॉक प्रबंधन, प्रजनन, हैचरी संचालन, क्वारंटीन, ट्रेसेबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए समान मानक तय करने की बात की गई है। इससे न केवल गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि रोगों के प्रसार, अनियंत्रित व्यापार और निर्यात से जुड़ी चुनौतियों को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
लक्षद्वीप की समुद्री क्षमता और योजना का संदर्भ
यह योजना ऐसे समय में आई है जब लक्षद्वीप की समुद्री क्षमता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। द्वीपसमूह में लगभग 4,200 वर्ग किलोमीटर का लैगून क्षेत्र और करीब 4 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र है। यहां वार्षिक मत्स्य संभावनाएं 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक आंकी गई हैं, जिनमें 94,000 टन ट्यूना शामिल है। हालांकि वर्तमान वार्षिक मत्स्य उत्पादन लगभग 15,000 मीट्रिक टन है। यह अंतर बताता है कि संसाधन मौजूद हैं, लेकिन उन्हें बेहतर प्रबंधन और अवसंरचना के जरिए अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है।
सरकारी योजनाओं से जुड़ाव और व्यापक असर
‘मिशन रंगीन मछली 2031’ को मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत जोड़ा गया है। इसके साथ ही लक्षद्वीप के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत 62 करोड़ रुपये से अधिक की मत्स्य विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। पीएमएमएसवाई देश में मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जो उत्पादन, उत्पादकता, आधारभूत ढांचे, कटाई के बाद प्रबंधन और वैल्यू चेन विकास को कवर करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ऑर्नामेंटल फिशरीज का अर्थ सजावटी और एक्वेरियम मछलियों का पालन, प्रजनन और व्यापार है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र समुद्र में बेसलाइन से 200 समुद्री मील तक का क्षेत्र होता है।
- मत्स्य क्षेत्र में जैव-सुरक्षा का मतलब रोग-निवारण, क्वारंटीन और रोगजनकों के फैलाव पर नियंत्रण है।
- ट्रेसेबिलिटी से मछली और मत्स्य उत्पादों को स्रोत से बिक्री तक ट्रैक किया जा सकता है।
भारत में मत्स्य उत्पादन 2013-14 के 95.7 लाख टन से बढ़कर हाल के वर्षों में 197.75 लाख टन तक पहुंच चुका है। ऐसे में ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ सजावटी मत्स्य पालन को एक संगठित, सुरक्षित और बाजारोन्मुख क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।