डीजीएफटी ने फ्री सेल सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को किया डिजिटल

डीजीएफटी ने फ्री सेल सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को किया डिजिटल

विदेश व्यापार को आसान बनाने की दिशा में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने फ्री सेल एंड कॉमर्स सर्टिफिकेट (FSC) जारी करने की प्रक्रिया को स्वचालित कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब पात्र ऑनलाइन आवेदनों पर तय मानकों के पूरा होते ही प्रमाणपत्र स्वतः जारी हो जाएगा, जबकि अपूर्ण या अतिरिक्त जांच वाले मामलों को क्षेत्रीय प्राधिकरण के पास भेजा जाएगा।

क्या है नया बदलाव

डीजीएफटी ने ट्रेड नोटिस संख्या 24/2026-2027 के जरिए यह व्यवस्था लागू की है। यह प्रक्रिया उन निर्यातकों के लिए है जो हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर्स के पैरा 2.34 के तहत प्रमाणपत्र लेते हैं और जिन उत्पादों पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 लागू नहीं होता। पहले ऐसे मामलों में सामान्यतः मैनुअल जांच, सत्यापन और मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब कई आवेदनों में यह काम सिस्टम स्तर पर अपने-आप होगा।

फ्री सेल एंड कॉमर्स सर्टिफिकेट क्यों जरूरी है

फ्री सेल एंड कॉमर्स सर्टिफिकेट उन उत्पादों के लिए जारी किया जाता है जो भारत के घरेलू बाजार में स्वतंत्र रूप से बेचे जा सकते हैं। कई विदेशी बाजारों में निर्यात मंजूरी के लिए यह दस्तावेज जरूरी माना जाता है, क्योंकि इससे यह प्रमाणित होता है कि उत्पाद भारत में वैध रूप से बिक्री योग्य है। इस तरह यह दस्तावेज निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुपालन प्रमाणपत्र की भूमिका निभाता है।

नई प्रणाली कैसे काम करेगी

नई व्यवस्था में ऑनलाइन आवेदन पहले सिस्टम-आधारित मानकों की जांच से गुजरेंगे। जो आवेदन तय शर्तों पर खरे उतरेंगे, उनके लिए प्रमाणपत्र स्वतः जनरेट हो जाएगा। जिन आवेदनों में कोई कमी होगी, या जिनमें अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत होगी, उन्हें संबंधित क्षेत्रीय प्राधिकरण के पास मैनुअल प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा, कुछ ऑटो-अप्रूव्ड आवेदनों की बाद में जोखिम-प्रबंधन मानकों के आधार पर समीक्षा भी की जा सकेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डीजीएफटी, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली वैधानिक संस्था है।
  • हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर्स भारत की विदेशी व्यापार प्रक्रियाओं के संचालन नियम तय करती है।
  • ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 भारत में दवाओं और कॉस्मेटिक्स के विनियमन से जुड़ा केंद्रीय कानून है।
  • डीजीएफटी की क्षेत्रीय प्राधिकरण इकाइयाँ उन मामलों में मैनुअल जांच करती हैं जो सिस्टम-आधारित मंजूरी के योग्य नहीं होते।

यह कदम भारत की डिजिटल ट्रेड फैसिलिटेशन नीति को आगे बढ़ाता है और निर्यात दस्तावेजों की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और कम कागजी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Originally written on September 1, 2026 and last modified on September 1, 2026.

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