मिशन कर्मयोगी 2.0 से बढ़ेगा सरकारी कर्मचारियों का कौशल विकास
भारत सरकार का “मिशन कर्मयोगी 2.0” सिविल सेवाओं में क्षमता निर्माण को मजबूत करने की दिशा में अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। यह राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (NPCSCB) का उन्नत चरण है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करना और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना है।
मिशन कर्मयोगी का ढांचा
मिशन कर्मयोगी में competency-based training और role-based learning मॉडल अपनाया गया है। इसके तहत कर्मचारियों को उनके कार्य और जिम्मेदारियों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है। इस पूरे ढांचे की देखरेख Capacity Building Commission (CBC) करता है, जिसे मिशन कर्मयोगी का संरक्षक संस्थान माना जाता है। CBC ने प्रशिक्षण सामग्री, गुणवत्ता मानकों और संस्थागत क्षमता निर्माण के लिए समान दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इससे विभिन्न सरकारी विभागों में प्रशिक्षण प्रणाली को अधिक प्रभावी और एकरूप बनाने में मदद मिली है।
iGOT प्लेटफॉर्म की भूमिका
मिशन कर्मयोगी के तहत Integrated Government Online Training यानी iGOT प्लेटफॉर्म को डिजिटल प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। 4 अप्रैल 2026 तक इस मंच पर 1.5 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी पंजीकृत हो चुके थे। प्लेटफॉर्म पर 8 करोड़ से अधिक course completions दर्ज किए गए और 4,600 से ज्यादा पाठ्यक्रम विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध हैं। सरकारी कर्मचारियों के learning outcomes को performance appraisal से भी जोड़ा गया है, जिससे प्रशिक्षण का सीधा प्रभाव कार्य निष्पादन पर दिखाई देने लगा है।
हाल की प्रमुख पहल
2 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक “साधना सप्ताह” का आयोजन किया गया। यह सरकारी अधिकारियों के लिए एक सप्ताह का क्षमता निर्माण कार्यक्रम था, जिसमें skill enhancement और AI-based training पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा 11 मार्च 2026 को मिशन कर्मयोगी ने Coursera Inc. के साथ साझेदारी की। इस सहयोग के तहत तकनीक, data analytics और leadership से जुड़े upskilling courses iGOT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
राज्यों और संस्थानों पर विशेष फोकस
मिशन कर्मयोगी 2.0 में राज्यों, frontline institutions और संगठनात्मक क्षमता निर्माण पर अधिक जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर संस्थागत सुधार को भी बढ़ावा देना है। उत्तर प्रदेश इस पहल में अग्रणी राज्यों में शामिल है। 23 मई 2026 तक राज्य के 5.41 लाख से अधिक कर्मचारियों ने चार से ज्यादा प्रशिक्षण मॉड्यूल पूरे किए थे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Capacity Building Commission का गठन मिशन कर्मयोगी ढांचे के तहत किया गया है।
- iGOT सरकारी कर्मचारियों के लिए डिजिटल प्रशिक्षण मंच है।
- मिशन कर्मयोगी में competency-based training को job roles से जोड़ा गया है।
- भारत अपने capacity-building मॉडल और प्रशासनिक सुधार अनुभव अन्य देशों के साथ भी साझा कर रहा है।
मिशन कर्मयोगी 2.0 भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे सरकारी कर्मचारियों की दक्षता बढ़ने के साथ-साथ शासन प्रणाली में पारदर्शिता और कार्यकुशलता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।