भारत 2027 से लागू करेगा सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल ब्लेंडिंग योजना

भारत 2027 से लागू करेगा सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल ब्लेंडिंग योजना

भारत सरकार ने जनवरी 2027 से Aviation Turbine Fuel में 1 प्रतिशत Sustainable Aviation Fuel यानी SAF मिलाने की योजना तैयार की है। सरकार ने इसके लिए चरणबद्ध लक्ष्य तय किए हैं, जिनमें 2027 में 1 प्रतिशत, 2028 में 2 प्रतिशत और वर्ष 2030 तक 5 प्रतिशत SAF blending का लक्ष्य शामिल है। शुरुआत में यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागू की जाएगी।

क्या है Sustainable Aviation Fuel

Sustainable Aviation Fuel एक कम-कार्बन उत्सर्जन वाला विमान ईंधन है, जिसका उपयोग हवाई जहाज संचालन में किया जाता है। भारत ने 23 अप्रैल 2026 की राजपत्र अधिसूचना के जरिए SAF को औपचारिक मान्यता दी। इसके तहत Aviation Turbine Fuel नियमों में संशोधन कर SAF को पारंपरिक jet fuel के साथ मिश्रित करने की अनुमति दी गई। SAF का उद्देश्य विमानन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और पर्यावरण अनुकूल हवाई परिवहन को बढ़ावा देना है।

नीति और नियामक ढांचा

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने SAF के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। यह योजना Carbon Offsetting and Reduction Scheme for International Aviation यानी CORSIA के तहत भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं से जुड़ी है। CORSIA का अनिवार्य चरण वर्ष 2027 से शुरू होगा। हालांकि 15 दिसंबर 2025 तक घरेलू उड़ानों में SAF blending के लिए कोई अलग नीति अधिसूचित नहीं की गई थी। सरकार वर्तमान में व्यापक SAF नीति तैयार कर रही है, जिससे भविष्य में अनिवार्य blending व्यवस्था लागू की जा सके।

उत्पादन की तैयारी

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन सितंबर 2026 तक पानीपत रिफाइनरी में used cooking oil से SAF उत्पादन शुरू करने की योजना बना रहा है। वहीं भारत पेट्रोलियम वर्ष 2026 के अंत तक मुंबई रिफाइनरी में co-processing unit शुरू करेगा। सरकार alcohol-to-jet तकनीक को भी राष्ट्रीय SAF रोडमैप का हिस्सा बनाने पर विचार कर रही है। इससे SAF उत्पादन क्षमता बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

मांग और संभावित प्रभाव

भारत में SAF की अनुमानित मांग वर्ष 2027 में 62,000 टन, 2028 में 1,30,000 टन और 2030 तक लगभग 3,80,000 टन रहने का अनुमान है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने कहा है कि वे इन जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 1 प्रतिशत SAF blending से हवाई टिकटों की कीमत पर लगभग 100 से 200 रुपये तक का असर पड़ सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CORSIA का पूरा नाम Carbon Offsetting and Reduction Scheme for International Aviation है।
  • SAF का उत्पादन used cooking oil और alcohol-to-jet feedstock जैसे non-fossil स्रोतों से किया जा सकता है।
  • Aviation Turbine Fuel जेट विमानों में उपयोग होने वाला मानक ईंधन है।
  • भारत की SAF blending योजना की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से की जाएगी।

भारत की यह पहल हरित ऊर्जा और स्वच्छ विमानन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भारत वैश्विक sustainable aviation प्रयासों में अपनी भूमिका मजबूत कर सकेगा।

Originally written on May 25, 2026 and last modified on May 25, 2026.

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