महाराष्ट्र में NDPS और SC-ST मामलों के लिए नई विशेष अदालतें

महाराष्ट्र में NDPS और SC-ST मामलों के लिए नई विशेष अदालतें

महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने 28 जुलाई 2026 को मादक पदार्थों से जुड़े मामलों और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत लंबित मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए नई अदालतों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में पुणे के लिए NDPS अधिनियम के तहत विशेष अदालत, पांच जिलों में SC-ST अधिनियम की विशेष अदालतें और करजत व कुर्डुवाड़ी में अतिरिक्त अदालतें स्वीकृत की गईं।

पुणे में NDPS मामलों के लिए अलग अदालत

पुणे जिले में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज यानी NDPS अधिनियम के तहत एक विशेष अदालत स्थापित की जाएगी। निर्णय के समय पुणे में इस कानून से जुड़े करीब 1,425 मामले लंबित थे। सरकार ने इस अदालत के लिए 1.26 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें एक जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश और सात सहायक कर्मचारी शामिल होंगे।

SC-ST अत्याचार मामलों के लिए पांच विशेष अदालतें

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत पांच समर्पित विशेष अदालतों को मंजूरी दी गई है। ये अदालतें अहिल्यानगर, परभणी, सोलापुर, नांदेड़ और यवतमाल में काम करेंगी। इन अदालतों के लिए 4.51 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और प्रत्येक अदालत में एक न्यायाधीश तैनात होगा।राज्य में इस कानून के तहत लंबित मामलों की संख्या भी काफी अधिक है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र में SC-ST अधिनियम से जुड़े 17,023 मामले लंबित थे। इनमें अहिल्यानगर में 1,014 और नांदेड़ में 735 मामले शामिल थे।

करजत और कुर्डुवाड़ी में भी न्यायिक ढांचा मजबूत होगा

मंत्रिमंडल ने केवल विशेष कानूनों से जुड़े मामलों पर ही नहीं, बल्कि सामान्य न्यायिक ढांचे को मजबूत करने पर भी फैसला लिया। अहिल्यानगर जिले के करजत में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय को मंजूरी दी गई है। वहीं सोलापुर जिले के माढा तालुका के कुर्डुवाड़ी में एक जूनियर डिवीजन सिविल कोर्ट और एक न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी अदालत स्थापित की जाएगी।

क्यों अहम है यह फैसला

NDPS और SC-ST अधिनियम दोनों ही ऐसे विशेष कानून हैं जिनमें संवेदनशील और गंभीर मामलों की सुनवाई के लिए अलग प्रक्रिया और समर्पित अदालतों की जरूरत होती है। विशेष अदालतों के बनने से मामलों की सुनवाई में तेजी आने, लंबित मामलों का बोझ घटने और पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • NDPS का पूरा नाम Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 है।
  • SC-ST अधिनियम का पूरा नाम Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 है।
  • जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय आम तौर पर गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई करते हैं।
  • न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी अदालतें अपेक्षाकृत कम गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई करती हैं।

महाराष्ट्र सरकार का यह कदम विशेष कानूनों के तहत लंबित मामलों को कम करने और न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Originally written on July 29, 2026 and last modified on July 29, 2026.

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