पेपर लीक पर सख्ती: लोकसभा में नया विधेयक पेश
सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने लोकसभा में एक संशोधन विधेयक पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य मौजूदा कानून को और कठोर बनाना है, ताकि परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल किया जा सके और संगठित रूप से होने वाली गड़बड़ियों पर तेज कार्रवाई की जा सके।
मौजूदा कानून में क्या है व्यवस्था
भारत में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू है। यह कानून 21 जून 2024 से प्रभावी हुआ था। इसके दायरे में पेपर लीक, नकल, प्रश्नपत्र से छेड़छाड़, किसी और की जगह परीक्षा देना और परीक्षा से जुड़ी अन्य धोखाधड़ी शामिल हैं।अब पेश किए गए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 में सजा और जुर्माने को काफी सख्त करने का प्रस्ताव है। सरकार का संकेत साफ है कि परीक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधों को केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि गंभीर अपराध की तरह देखा जाएगा।
कितनी सजा और कितना जुर्माना प्रस्तावित है
संशोधन विधेयक के अनुसार पेपर लीक या अन्य अनुचित साधनों में शामिल व्यक्तियों को 5 से 10 साल तक की कैद हो सकती है। इसके साथ ही व्यक्तिगत अपराधियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है।यदि मामला संगठित अपराध से जुड़ा है, यानी किसी नेटवर्क या गिरोह के जरिए पेपर लीक कराया गया है, तो न्यूनतम 7 साल की सजा का प्रावधान रखा गया है। ऐसे मामलों में 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी प्रस्तावित है। यह प्रावधान संगठित परीक्षा माफिया पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जांच और सुनवाई को तेज करने की कोशिश
विधेयक में जांच को समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया गया है। प्रस्ताव है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी की जाए। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह अधिकार दिया जाएगा कि वे आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें बना सकें।यह व्यवस्था इसलिए अहम है क्योंकि परीक्षा संबंधी मामलों में देरी से न केवल जांच कमजोर पड़ती है, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा भी प्रभावित होता है। तेज सुनवाई से जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लोकसभा भारतीय संसद का निचला सदन है।
- Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 21 जून 2024 से लागू है।
- पेपर लीक को सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधन माना जाता है।
- फास्ट-ट्रैक अदालतों का उद्देश्य मामलों का शीघ्र निपटारा करना होता है।
कुल मिलाकर यह विधेयक परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्ती दोनों बढ़ाने की दिशा में कदम माना जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है, तो पेपर लीक और संगठित परीक्षा अपराधों पर रोक लगाने के लिए अधिक मजबूत कानूनी ढांचा उपलब्ध होगा।