मसूरी में बहुभाषी एआई से मजबूत हुआ भारत का प्रशासनिक सहयोग

मसूरी में बहुभाषी एआई से मजबूत हुआ भारत का प्रशासनिक सहयोग

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग ने मसूरी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाषिणी के श्रुतलेख मंच का उपयोग किया। 12 से 23 अक्टूबर 2026 तक चल रहे इस कार्यक्रम के परिचय सत्र में अंग्रेज़ी और स्पेनिश के बीच वास्तविक समय में दोनों दिशाओं में अनुवाद की सुविधा दी गई।

श्रुतलेख से भाषा की बाधा कम करने की पहल

राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) का यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम विभिन्न देशों के सिविल सेवकों के लिए शहरी सेवा वितरण पर केंद्रित है। सत्र के दौरान भाषिणी की टीम ने प्रतिभागियों को अपनी बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं और मोबाइल अनुप्रयोग से परिचित कराया। श्रुतलेख ने अंग्रेज़ी में कही गई बात को स्पेनिश में और स्पेनिश में कही गई बात को अंग्रेज़ी में समझने योग्य बनाने में मदद की। इससे अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले अधिकारियों के बीच संवाद आसान हुआ।

भाषिणी की ‘वाणी-प्रथम’ पद्धति में बातचीत को समझने और दूसरी भाषा में पहुँचाने के लिए वाणी-आधारित तकनीकों का इस्तेमाल होता है। स्वचालित वाणी पहचान बोलकर कही गई भाषा को पाठ में बदलती है। इसके बाद मशीनी अनुवाद उस पाठ को दूसरी भाषा में रूपांतरित करता है, जबकि पाठ-से-वाणी तकनीक लिखित सामग्री को सुनाई देने वाली आवाज़ में बदल सकती है। इन तकनीकों का मेल डिजिटल सेवाओं में अलग-अलग भाषाओं के उपयोग को सुगम बना सकता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग

कार्यक्रम का आयोजन प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के अंतर्गत एनसीजीजी ने किया है और इसे विदेश मंत्रालय का प्रायोजन प्राप्त है। यह भारत के अंतरराष्ट्रीय क्षमता निर्माण प्रयासों तथा भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम से जुड़ा है। आईटीईसी के माध्यम से भारत साझेदार देशों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराता है।

कार्यक्रम में पेरू, कंबोडिया, नाइजीरिया, केन्या, फलस्तीन, लेबनान, गाम्बिया, इक्वाडोर और स्पेन के सिविल सेवक तथा सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। एनसीजीजी सिविल सेवकों के क्षमता निर्माण के साथ सुशासन से जुड़े शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान में भी भूमिका निभाता है।

सरकारी मंचों पर भाषिणी की पहुंच

भाषिणी की भाषा-तकनीकें 2,353 सरकारी मंचों से जुड़ी हैं, जिनमें 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटें शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंच 36 भारतीय भाषाओं में पाठ सेवाएँ, 23 भारतीय भाषाओं में वाणी सेवाएँ और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के लिए समर्थन देता है। इन साधनों का उपयोग वेबसाइटों और मोबाइल अनुप्रयोगों जैसी नागरिकों से सीधे जुड़ी डिजिटल सेवाओं में किया जा सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भाषिणी का कार्यान्वयन इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग करता है।
  • मसूरी कार्यक्रम में श्रुतलेख ने अंग्रेज़ी और स्पेनिश के बीच वास्तविक समय का द्विदिश अनुवाद किया।
  • आईटीईसी विदेश मंत्रालय का अंतरराष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम है।
  • भाषिणी की तकनीकें 2,353 सरकारी मंचों से एकीकृत हैं।

मसूरी में भाषिणी का उपयोग दिखाता है कि वाणी-आधारित बहुभाषी तकनीक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और सार्वजनिक सेवाओं में संवाद को अधिक सुलभ बनाने में उपयोगी हो सकती है।

Originally written on October 13, 2026 and last modified on October 13, 2026.

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