भारत-स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का किया समर्थन
भारत और स्लोवाकिया ने 15 जून 2026 को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया। इस संयुक्त बयान में दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय संस्थानों में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन दोहराया। यह भारत के लंबे समय से चल रहे संयुक्त राष्ट्र सुधार अभियान को महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद क्या है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है, जिसकी स्थापना 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत की गई थी। इसका मुख्य कार्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। वर्तमान में सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें—
- 5 स्थायी सदस्य
- 10 अस्थायी सदस्य
शामिल हैं। अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है।
सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग
भारत और स्लोवाकिया के संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि सुरक्षा परिषद को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधिक, समावेशी, प्रभावी और संतुलित बनाया जाना चाहिए। दोनों देशों ने परिषद में—
- स्थायी सदस्य श्रेणी का विस्तार
- अस्थायी सदस्य श्रेणी का विस्तार
करने का समर्थन किया। यह मांग लंबे समय से चल रही उस बहस का हिस्सा है जिसमें विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात की जाती रही है।
भारत की स्थायी सदस्यता की मांग
भारत कई वर्षों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। भारत का तर्क है कि वह—
- विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था है,
- विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल है,
- वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान देता है,
इसलिए उसे सुरक्षा परिषद में स्थायी स्थान मिलना चाहिए। स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने 15 जून 2026 को कहा कि भारत जैसे देशों को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए और उनका देश इस मांग का दृढ़ समर्थन करता है।
वर्तमान स्थायी सदस्य कौन हैं?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वर्तमान पांच स्थायी सदस्य हैं—
- चीन
- फ्रांस
- रूस
- यूनाइटेड किंगडम
- संयुक्त राज्य अमेरिका
इन सभी देशों के पास वीटो शक्ति (Veto Power) है, जिसके माध्यम से वे किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को रोक सकते हैं।
भारत-स्लोवाकिया संबंधों को मिला नया आयाम
15 जून 2026 को भारत और स्लोवाकिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक साझेदारी (Comprehensive Partnership) के स्तर तक उन्नत किया। व्यापक साझेदारी एक ऐसा औपचारिक ढांचा होता है जिसके अंतर्गत दोनों देश राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत बनाते हैं।
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह पर भी समर्थन
स्लोवाकिया ने भारत की न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) सदस्यता के प्रति भी सकारात्मक और रचनात्मक रुख दोहराया। NSG एक 48 सदस्यीय निर्यात नियंत्रण समूह है जो परमाणु सामग्री और तकनीक के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है। भारत लंबे समय से इस समूह की सदस्यता प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है।
बहुपक्षीय सहयोग का महत्व
भारत और स्लोवाकिया का यह संयुक्त रुख वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समर्थन भारत की वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत हुई थी।
- सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं।
- पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं।
- स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति होती है।
- भारत लंबे समय से UNSC की स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है।
- भारत और स्लोवाकिया ने 15 जून 2026 को अपने संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया।
- न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) की स्थापना 1974 में हुई थी।
- संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश हैं।
भारत और स्लोवाकिया द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन वैश्विक संस्थागत सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है। यह भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका, वैश्विक प्रभाव और बहुपक्षीय मंचों पर उसके योगदान की व्यापक स्वीकृति को भी दर्शाता है।