भारत-यूरोपीय संघ मानवाधिकार संवाद का 12वां संस्करण नई दिल्ली में आयोजित
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मानवाधिकार संबंधी सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से 24 जून 2026 को नई दिल्ली में भारत-यूरोपीय संघ मानवाधिकार संवाद का 12वां संस्करण आयोजित किया गया। यह संवाद दोनों पक्षों के बीच मानवाधिकार, लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मंच है। इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (यूरोप पश्चिम) पीयूष श्रीवास्तव तथा भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने की।
भारत-यूरोपीय संघ मानवाधिकार संवाद क्या है?
भारत-यूरोपीय संघ मानवाधिकार संवाद एक द्विपक्षीय तंत्र है, जिसके माध्यम से दोनों पक्ष मानवाधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर नियमित चर्चा करते हैं। इस संवाद में नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर भी विचार किया जाता है। इसके अतिरिक्त भेदभाव, प्रवासियों के अधिकार, धर्म या आस्था की स्वतंत्रता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण विषय भी एजेंडे का हिस्सा होते हैं। इस मंच का उद्देश्य आपसी समझ बढ़ाना, अनुभव साझा करना और मानवाधिकारों के क्षेत्र में सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
2026 संवाद के प्रमुख मुद्दे
इस वर्ष के संवाद में लैंगिक अधिकार, एलजीबीटीक्यूआई+ समुदाय के अधिकार तथा बाल अधिकारों पर विशेष चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने नागरिक समाज संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की स्वतंत्रता, विविधता और निष्पक्ष कार्य वातावरण के महत्व पर भी विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही शांतिपूर्ण सभा करने की स्वतंत्रता और संगठन बनाने के अधिकार जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी चर्चा की गई। इन विषयों को समावेशी और लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला माना गया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवाधिकार
बैठक में विश्वसनीय, टिकाऊ और मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास के प्रति भी दोनों पक्षों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस संदर्भ में भारत द्वारा आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उल्लेख किया गया, जहां जिम्मेदार और सुरक्षित एआई के विकास पर वैश्विक स्तर पर चर्चा हुई थी। एआई तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह माना गया कि नवाचार के साथ-साथ मानवाधिकारों और नैतिक मूल्यों की सुरक्षा भी समान रूप से आवश्यक है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूरोपीय संघ अपनी मानवाधिकार नीति के तहत मृत्युदंड (कैपिटल पनिशमेंट) का विरोध करता है।
- भारत विकास के अधिकार (Right to Development) को एक विशिष्ट, सार्वभौमिक, अविच्छेद्य और मौलिक मानवाधिकार के रूप में मान्यता देता है।
- भारत-यूरोपीय संघ का 16वां शिखर सम्मेलन जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।
- भारत-यूरोपीय संघ मानवाधिकार संवाद का अगला, अर्थात 13वां संस्करण वर्ष 2027 में आयोजित किया जाएगा।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मानवाधिकार संवाद दोनों पक्षों की रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोकतंत्र, मानवाधिकार और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों के आधार पर यह मंच आपसी सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक चुनौतियों पर समन्वित दृष्टिकोण विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।