एयर सुविधा 2.0: इबोला प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए भारत ने फिर शुरू की स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था

एयर सुविधा 2.0: इबोला प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए भारत ने फिर शुरू की स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था

भारत सरकार ने इबोला वायरस के बढ़ते वैशिक खतरे को देखते हुए 25 जून 2026 से एयर सुविधा पोर्टल को नए स्वरूप एयर सुविधा 2.0 के रूप में दोबारा सक्रिय कर दिया है। यह व्यवस्था उन यात्रियों पर लागू होगी जो इबोला प्रभावित देशों से भारत आ रहे हैं या उन देशों के रास्ते भारत पहुंच रहे हैं। इस कदम का उद्देश्य देश में संक्रामक रोगों की समय रहते पहचान करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाना है।

एयर सुविधा 2.0 क्या है और इसका उद्देश्य

एयर सुविधा एक संपर्क रहित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उपयोग भारतीय हवाई अड्डों पर यात्रियों के स्वास्थ्य संबंधी विवरण और यात्रा जानकारी एकत्र करने के लिए किया जाता है। इसे पहली बार वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किया गया था। अब एयर सुविधा 2.0 के तहत संबंधित यात्रियों को विमान से उतरने से पहले ऑनलाइन सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरना अनिवार्य होगा। इस फॉर्म में पिछले 21 दिनों की यात्रा और संभावित संक्रमण संबंधी जानकारी दर्ज करनी होगी, जिससे प्रवेश बिंदुओं पर स्वास्थ्य जांच अधिक प्रभावी हो सके।

इबोला प्रकोप और वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल

17 मई 2026 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैले इबोला (बुंडिबुग्यो वायरस) प्रकोप को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) घोषित किया। यह अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत ऐसी स्थिति होती है, जिसमें वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता होती है। इसी पृष्ठभूमि में भारत ने अपनी सीमा स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था को और सशक्त बनाने का निर्णय लिया है।

डेटा साझाकरण और संस्थागत व्यवस्था

एयर सुविधा प्रणाली का संचालन नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से किया जाता है। पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम तथा राज्य स्तरीय निगरानी अधिकारियों के साथ साझा की जाती है। इससे संभावित संक्रमित यात्रियों की पहचान, निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सकती है।

इबोला से निपटने के लिए भारत की तैयारी

17 जून 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने इबोला की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास प्रयासों के लिए भारत की ओर से 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता की घोषणा की। इसके अतिरिक्त भारत अफ्रीकी देशों को 45 टन चिकित्सा सामग्री उपलब्ध करा चुका है तथा भविष्य में दवाओं, प्रयोगशाला उपकरणों, निदान सामग्री और पोषण संबंधी सहायता देने की भी प्रतिबद्धता जताई है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • इबोला वायरस रोग फिलोविरिडी (Filoviridae) परिवार से संबंधित है।
  • कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में वर्ष 1976 से इबोला के कई प्रकोप दर्ज किए जा चुके हैं।
  • इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन भारत के गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

एयर सुविधा 2.0 की पुनः शुरुआत यह दर्शाती है कि भारत संक्रामक रोगों से उत्पन्न वैश्विक चुनौतियों के प्रति सतर्क है। डिजिटल स्वास्थ्य निगरानी, समयबद्ध स्क्रीनिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से देश संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को सीमित करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

Originally written on June 25, 2026 and last modified on June 25, 2026.

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