भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से होगा लागू
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होने जा रहा है। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति देने वाला माना जा रहा है। समझौते पर 24 जुलाई 2025 को औपचारिक हस्ताक्षर किए गए थे, जबकि दोनों पक्षों ने 6 मई 2025 को इसके सिद्धांतगत मसौदे (Agreement in Principle) पर सहमति बनाई थी।
समझौते की समयरेखा
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में कई वर्षों तक वार्ताएं चलीं। 6 मई 2025 को दोनों देशों ने समझौते के मुख्य बिंदुओं पर सहमति व्यक्त की। इसके बाद 24 जुलाई 2025 को भारत के वाणिज्य मंत्रालय और ब्रिटेन के अधिकारियों ने इस पर औपचारिक हस्ताक्षर किए। 17 जून 2026 को दोनों सरकारों ने घोषणा की कि समझौते को लागू करने के लिए आवश्यक सभी घरेलू और प्रक्रियागत औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। इसके परिणामस्वरूप यह समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होगा।
शुल्क (टैरिफ) में बड़े बदलाव
इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच व्यापारित वस्तुओं पर कई महत्वपूर्ण शुल्क कटौतियां की जाएंगी। भारत में आयात होने वाली ब्रिटिश व्हिस्की पर वर्तमान 150 प्रतिशत शुल्क को घटाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा। इसी प्रकार ऑटोमोबाइल क्षेत्र में लागू 100 प्रतिशत आयात शुल्क को विशेष कोटा व्यवस्था के अंतर्गत 10 प्रतिशत तक कम किया जाएगा। दूसरी ओर, यूनाइटेड किंगडम भी भारतीय उत्पादों पर शुल्क कम करेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारतीय निर्यात को मिलेगा लाभ
ब्रिटेन भारतीय वस्त्र, परिधान, फुटवियर और कुछ खाद्य उत्पादों पर शुल्क में कटौती करेगा। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता ब्रिटिश बाजार में बढ़ेगी और निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) तथा श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
व्यापार और आर्थिक प्रभाव
समझौते के अनुसार दीर्घकाल में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 25.5 अरब पाउंड प्रतिवर्ष की अतिरिक्त वृद्धि होने का अनुमान है। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में भी इससे लगभग 4.8 अरब पाउंड का अतिरिक्त योगदान होने की संभावना जताई गई है। यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
व्यवसायों के लिए तैयारी अवधि
17 जून 2026 को औपचारिक घोषणा के बाद दोनों देशों के व्यवसायों को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार होने के लिए 28 दिन का समय दिया गया है। 15 जुलाई 2026 से सभी पात्र वस्तुओं का व्यापार नए शुल्क ढांचे और नियमों के अनुसार शुरू होगा।
मुक्त व्यापार समझौते का महत्व
मुक्त व्यापार समझौता दो या अधिक देशों के बीच ऐसा समझौता होता है जिसके तहत व्यापारिक बाधाओं को कम किया जाता है। इन समझौतों के माध्यम से—
- आयात शुल्क कम किए जाते हैं,
- बाजार तक पहुंच आसान बनाई जाती है,
- निवेश को बढ़ावा दिया जाता है,
- और व्यापारिक सहयोग को मजबूत किया जाता है।
भारत और यूके के बीच यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होगा।
- समझौते पर 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षर किए गए थे।
- 6 मई 2025 को दोनों देशों ने समझौते के सिद्धांतगत मसौदे पर सहमति बनाई थी।
- भारतीय बाजार में ब्रिटिश व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटाकर 40% किया जाएगा।
- ऑटोमोबाइल आयात शुल्क 100% से घटाकर 10% किया जाएगा।
- ब्रिटेन भारतीय वस्त्र, फुटवियर और कुछ खाद्य उत्पादों पर शुल्क कम करेगा।
- समझौते से दीर्घकाल में 25.5 अरब पाउंड वार्षिक अतिरिक्त व्यापार होने का अनुमान है।
- मुक्त व्यापार समझौते व्यापारिक बाधाओं को कम करने और बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए किए जाते हैं।
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। शुल्क कटौती, बाजार पहुंच और व्यापारिक सहयोग के माध्यम से यह समझौता निवेश, रोजगार और निर्यात वृद्धि को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।