भारत ने यूरिया आयात में नए स्रोतों पर बढ़ाई निर्भरता
देश में उर्वरक आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए भारत ने 2026 में यूरिया आयात के लिए पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं के अलावा मिस्र, अल्जीरिया, नाइजीरिया और जॉर्जिया जैसे देशों से खरीद बढ़ाई है। पश्चिम एशिया में युद्ध से आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने के बाद यह कदम घरेलू बाजार में यूरिया की उपलब्धता बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आपूर्ति संकट के बीच आयात का नया संतुलन
अप्रैल से जून 2026 के बीच भारत ने कुल 25 लाख टन आयातित यूरिया में से 52 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं गैर-पारंपरिक स्रोतों से हासिल किया। इस अवधि में 17 देशों से 15.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डाइ-अमोनियम फॉस्फेट यानी डीएपी का आयात किया गया। जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार मिस्र से 3.95 लाख टन, अल्जीरिया से 1.65 लाख टन, नाइजीरिया से 1.38 लाख टन और जॉर्जिया से 1.22 लाख टन यूरिया आया।
यह बदलाव बताता है कि भारत अब उर्वरक आयात में केवल कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भर रहने के बजाय आपूर्ति स्रोतों को विविध बना रहा है। इससे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव या समुद्री मार्गों में बाधा आने पर जोखिम कम किया जा सकता है।
सब्सिडी का बोझ और कीमतों का दबाव
आयातित यूरिया पर सब्सिडी भुगतान 2025-26 में 128.4 प्रतिशत बढ़कर 47,956.24 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि 2024-25 में यह लगभग 21,000 करोड़ रुपये था। वित्तीय अनुमानों में 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी बिल 3.4 लाख करोड़ रुपये तक जाने की आशंका जताई गई है, जबकि शुरुआती बजट आवंटन 1.71 लाख करोड़ रुपये रखा गया था।
यह अंतर सरकार के लिए दोहरी चुनौती दिखाता है। एक ओर किसानों को समय पर और सस्ती दर पर उर्वरक उपलब्ध कराना जरूरी है, दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात लागत से राजकोषीय दबाव भी बढ़ रहा है।
समुद्री मार्ग और खरीद व्यवस्था की भूमिका
जुलाई 2026 में भारतीय शिपिंग मार्गों से 15 जहाज यूरिया, डीएपी और सल्फर लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होते हुए भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचे। यह समुद्री गलियारा पश्चिम एशिया से आने वाले उर्वरक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन यही क्षेत्र तनावग्रस्त होने पर सबसे अधिक संवेदनशील भी बन जाता है।
इसी बीच भारतीय पोटाश लिमिटेड ने 24 अप्रैल 2026 को 25 लाख टन यूरिया के आयात के लिए टेंडर अंतिम रूप दिया। वेस्ट कोस्ट डिलीवरी के लिए कीमत 935 डॉलर प्रति टन और ईस्ट कोस्ट के लिए 959 डॉलर प्रति टन तय की गई। इससे स्पष्ट है कि आयात व्यवस्था में बंदरगाह, ढुलाई और क्षेत्रीय लागत भी बड़ी भूमिका निभाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूरिया एक नाइट्रोजनी उर्वरक है और भारतीय कृषि में सबसे अधिक उपयोग होने वाले उर्वरकों में शामिल है।
- डीएपी यानी डाइ-अमोनियम फॉस्फेट एक फॉस्फेटिक उर्वरक है, जिसका उपयोग बुवाई और शुरुआती फसल वृद्धि में किया जाता है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है।
- भारतीय पोटाश लिमिटेड भारत में उर्वरक आयात और वितरण से जुड़ी प्रमुख कंपनी है।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि भारत की उर्वरक नीति अब केवल घरेलू मांग पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति जोखिम, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और सब्सिडी प्रबंधन को साथ लेकर चल रही है।