नाबार्ड की जलवायु-तकनीक पहल से खेती और ग्रामीण ऋण आकलन को नई दिशा
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज के अंतिम विजेताओं की घोषणा की। यह पहल कृषि में जलवायु जोखिम का आकलन करने वाले डिजिटल समाधानों को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की गई थी और इसमें डेटा इन क्लाइमेट रेज़िलिएंट एग्रीकल्चर (DiCRA) ढांचे का उपयोग किया गया।
क्या है यह नवाचार चुनौती
इस चुनौती का उद्देश्य ऐसे तकनीकी समाधान तलाशना था, जो किसानों, ग्रामीण संस्थाओं और ऋण व्यवस्था को मौसम से जुड़े जोखिमों को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकें। इसमें सैटेलाइट डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाइमेट मॉडलिंग जैसी तकनीकों के जरिए ऐसे अनुप्रयोग विकसित किए गए, जो ग्रामीण निर्णय-निर्माण में उपयोगी हों।
नाबार्ड के अनुसार, यह पहल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए जलवायु-लचीली खेती को मजबूत करने और मौसम-आधारित ग्रामीण ऋण जोखिम का आकलन करने की दिशा में एक कदम है।
कौन बने विजेता और क्या रहे उनके समाधान
सैटसोर एनालिटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को पहला पुरस्कार मिला। कंपनी ने एक ऐसा क्लाइमेट वल्नरेबिलिटी इंडेक्स तैयार किया, जो भारत के गांवों को मौसम जोखिम के आधार पर रैंक करता है। इसके लिए 15 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया।
दूसरा पुरस्कार एक्सपेरिक्यूएस प्राइवेट लिमिटेड को मिला, जिसने सूखे की स्थिति पर नजर रखने और फसल चक्र पर उसके प्रभाव का पूर्वानुमान लगाने वाला प्लेटफॉर्म विकसित किया। इसे 10 लाख रुपये मिले।
तीसरा पुरस्कार वर्साप्रदाया प्राइवेट लिमिटेड को मिला, जिसका डिजिटल इंजन खतरे की स्कोरिंग और सिंचाई योजना से जुड़े इनपुट उपलब्ध कराता है। इस टीम को 5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया।
चयन प्रक्रिया और नाबार्ड की भूमिका
इस चुनौती में 150 से अधिक आवेदनों में से विजेताओं का चयन किया गया। पहले चरण में 20 प्रोटोटाइप निर्माताओं को चुना गया, फिर 11 फाइनलिस्ट तक प्रक्रिया पहुंची और अंत में तीन विजेता तय किए गए।
नाबार्ड की स्थापना 1982 में नाबार्ड अधिनियम, 1981 के तहत हुई थी। यह कृषि, ग्रामीण विकास और संबंधित ऋण सहायता के लिए भारत की शीर्ष विकास वित्त संस्था है। नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने इस पहल को मौसम से जुड़े ग्रामीण ऋण जोखिम के आकलन और टिकाऊ कृषि के लिए महत्वपूर्ण बताया। विजेता टीमों को 12 जुलाई 2026 को नाबार्ड फाउंडेशन डे समारोह में सम्मानित भी किया गया था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नाबार्ड की स्थापना 1982 में नाबार्ड अधिनियम, 1981 के तहत हुई थी।
- DiCRA का पूरा नाम Data in Climate Resilient Agriculture है।
- क्लाइमेट वल्नरेबिलिटी इंडेक्स किसी क्षेत्र को बाढ़, सूखा और हीट स्ट्रेस जैसे मौसम जोखिमों के आधार पर रैंक करने में मदद करता है।
- इस चुनौती में 150 से अधिक आवेदनों में से 3 विजेताओं का चयन किया गया।
यह पहल दिखाती है कि कृषि, जलवायु तकनीक और ग्रामीण वित्त को जोड़कर जोखिम प्रबंधन के नए मॉडल तैयार किए जा सकते हैं। आने वाले समय में ऐसे समाधान फसल सुरक्षा, ऋण मूल्यांकन और ग्रामीण योजना-निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते हैं।