भारत में तितली और पतंगों की सबसे बड़ी सूची तैयार, जैव विविधता शोध को नई आधारशिला

भारत में तितली और पतंगों की सबसे बड़ी सूची तैयार, जैव विविधता शोध को नई आधारशिला

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) ने भारत की तितलियों और पतंगों यानी लेपिडोप्टेरा का पहला व्यापक राष्ट्रीय कैटलॉग पूरा कर लिया है। 30 जुलाई 2026 को जारी यह कार्य देश में दर्ज 13,703 प्रजातियों को एक ही संदर्भ में समेटता है और भारतीय जैव विविधता अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनता है।

12 साल के शोध का समेकित परिणाम

यह कैटलॉग 12 वर्षों के शोध, क्षेत्रीय सर्वेक्षणों, संग्रहालयीय अध्ययन और वैज्ञानिक साहित्य की जांच के बाद तैयार किया गया है। इसमें 3,705 वंश, 240 उपकुल, 102 कुल और 31 सुपरफैमिली शामिल हैं। अब तक बिखरे हुए टैक्सोनॉमिक रिकॉर्ड को एक राष्ट्रीय संदर्भ-ग्रंथ के रूप में व्यवस्थित कर दिया गया है, जिससे प्रजातियों की पहचान और वर्गीकरण अधिक स्पष्ट होगा।कैटलॉग को 22 खंडों में तैयार किया गया है। इसका अंतिम खंड अंतरराष्ट्रीय पत्रिका Zootaxa में प्रकाशित हुआ, जिसमें शेष 1,689 प्रजातियों का विवरण शामिल है। इस प्रक्रिया के दौरान कई दर्ज समूहों से जुड़ी वर्गीकरण संबंधी अस्पष्टताओं को भी दूर किया गया।

भारत की जैव विविधता और परागण तंत्र के लिए अहम

लेपिडोप्टेरा में तितलियाँ और पतंगें दोनों शामिल होती हैं। ये कीट केवल जैव विविधता का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र में परागण, खाद्य शृंखला और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़े हैं। विशेष रूप से पतंगों की बड़ी संख्या यह संकेत देती है कि भारत रात्रिचर परागणकों के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।कैटलॉग में जियोमेट्रोइडिया नामक प्रमुख सुपरफैमिली पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। भारत में इस समूह की 2,205 दर्ज प्रजातियाँ हैं। यह तथ्य देश की कीट विविधता की व्यापकता को दर्शाता है और भविष्य के संरक्षण अध्ययनों के लिए उपयोगी आधार प्रदान करता है।

शोध, संरक्षण और जलवायु अध्ययन में उपयोगी संदर्भ

यह राष्ट्रीय सूची केवल प्रजातियों की गिनती भर नहीं है, बल्कि जैव विविधता अनुसंधान, पारिस्थितिक निगरानी, जलवायु परिवर्तन अध्ययन और संरक्षण योजना के लिए एक मानक संदर्भ भी है। इससे भारतीय कीट विज्ञान में प्रजाति पहचान, टैक्सोनॉमिक वर्गीकरण और क्षेत्रीय तुलना को अधिक वैज्ञानिक आधार मिलेगा।ZSI की स्थापना 1916 में हुई थी और यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। संस्था का यह प्रयास भारत की प्राकृतिक विरासत को दस्तावेज़ित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लेपिडोप्टेरा कीटों का वह वर्ग है जिसमें तितलियाँ और पतंगें शामिल होती हैं।
  • भारतीय कैटलॉग में 13,703 प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं, जो विश्व की ज्ञात लेपिडोप्टेरा प्रजातियों का लगभग 8.25% है।
  • भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) की स्थापना 1916 में हुई थी।
  • Zootaxa एक अंतरराष्ट्रीय, सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका है जो प्राणी वर्गिकी और प्रणालीगत अध्ययन प्रकाशित करती है।

इस कैटलॉग के साथ भारत के कीट-विज्ञान अध्ययन को एक मजबूत राष्ट्रीय आधार मिल गया है। आने वाले वर्षों में यह दस्तावेज़ संरक्षण नीति, शोध और जैव विविधता प्रबंधन—तीनों के लिए उपयोगी साबित होगा।

Originally written on July 31, 2026 and last modified on July 31, 2026.

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