भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार
भारत ने वैश्विक विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अप्रैल 2024 में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बनने का स्थान प्राप्त किया। इस अवधि में भारत की घरेलू एयरलाइन क्षमता 15.6 मिलियन सीटों तक पहुंच गई, जिससे उसने ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया। घरेलू विमानन बाजार के मामले में भारत अब केवल संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन से पीछे है। यह उपलब्धि भारत के तेजी से बढ़ते हवाई यात्रा क्षेत्र और मजबूत आर्थिक विकास को दर्शाती है।
घरेलू विमानन बाजार क्या होता है?
घरेलू विमानन बाजार से तात्पर्य किसी देश की सीमाओं के भीतर संचालित होने वाली यात्री हवाई सेवाओं से है। इसमें एक देश के विभिन्न शहरों और राज्यों के बीच होने वाली हवाई यात्रा शामिल होती है। इस क्षेत्र की क्षमता का आकलन आमतौर पर निर्धारित अवधि में एयरलाइनों द्वारा उपलब्ध कराई गई कुल सीटों के आधार पर किया जाता है। विमानन क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों और विश्लेषण के लिए ओएजी (OAG) जैसी वैश्विक कंपनियां एयरलाइन क्षमता और उड़ान अनुसूचियों का अध्ययन करती हैं।
वैश्विक विमानन बाजार में भारत की स्थिति
वर्ष 2024 में भारत समग्र वैश्विक विमानन बाजार में पांचवें स्थान पर रहा, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की यात्री सेवाएं शामिल हैं। हालांकि घरेलू विमानन क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। दिलचस्प बात यह है कि एक दशक पहले भारत घरेलू विमानन बाजार में पांचवें स्थान पर था। लगातार बढ़ती यात्री संख्या, बेहतर हवाई संपर्क और नए हवाई अड्डों के विकास ने भारत को तीसरे स्थान तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
क्षमता वृद्धि में उल्लेखनीय प्रदर्शन
भारत ने 2014 से 2024 के बीच शीर्ष पांच घरेलू विमानन बाजारों में सबसे तेज़ वृद्धि करने वाले देशों में स्थान बनाया। इस अवधि में भारत की औसत वार्षिक क्षमता वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रही। यह वृद्धि देश में बढ़ती आय, मध्यम वर्ग के विस्तार, क्षेत्रीय संपर्क योजनाओं और विमानन क्षेत्र में बढ़ते निवेश का परिणाम मानी जा रही है।
लो-कॉस्ट एयरलाइनों का बढ़ता प्रभाव
भारतीय घरेलू विमानन बाजार की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक कम लागत वाली एयरलाइनों (Low-Cost Carriers – LCCs) का प्रभुत्व है। अप्रैल 2024 में भारत की कुल घरेलू विमानन क्षमता का 78.4 प्रतिशत हिस्सा लो-कॉस्ट एयरलाइनों के पास था, जो दुनिया के शीर्ष पांच घरेलू विमानन बाजारों में सबसे अधिक हिस्सा माना गया। सस्ती हवाई यात्रा की उपलब्धता ने बड़ी संख्या में नए यात्रियों को विमानन क्षेत्र से जोड़ा है।
इंडिगो की मजबूत स्थिति
भारत की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो ने घरेलू बाजार में अपनी स्थिति लगातार मजबूत की है। वर्ष 2014 में जहां कंपनी का घरेलू क्षमता में हिस्सा 32 प्रतिशत था, वहीं अप्रैल 2024 तक यह बढ़कर 62 प्रतिशत हो गया। इंडिगो की व्यापक नेटवर्क रणनीति, समयबद्ध सेवाएं और कम लागत वाला संचालन मॉडल उसकी सफलता के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
हवाई अड्डों का तेजी से विस्तार
भारत में विमानन क्षेत्र के विकास का एक प्रमुख कारण हवाई अड्डा अवसंरचना का विस्तार भी है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, देश में परिचालन हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 थी, जो 2025 तक बढ़कर 164 हो गई। इस विस्तार से दूरदराज के क्षेत्रों को भी हवाई संपर्क प्राप्त हुआ है और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय विमानन बाजार का आकार वर्ष 2025 में 16.24 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2034 तक 45.59 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इस अवधि में बाजार की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) 11.72 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक विमानन उद्योग के प्रमुख केंद्रों में से एक बन सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत अप्रैल 2024 में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बना।
- घरेलू विमानन बाजार में भारत से आगे केवल अमेरिका और चीन हैं।
- अप्रैल 2024 में भारत की घरेलू एयरलाइन क्षमता 15.6 मिलियन सीट रही।
- भारत की घरेलू विमानन क्षमता का 78.4 प्रतिशत हिस्सा लो-कॉस्ट एयरलाइनों के पास था।
- इंडिगो का घरेलू क्षमता में हिस्सा अप्रैल 2024 तक 62 प्रतिशत पहुंच गया।
- भारत में परिचालन हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 2025 में 164 हो गई।
भारत का दुनिया के तीसरे सबसे बड़े घरेलू विमानन बाजार के रूप में उभरना देश की आर्थिक प्रगति और परिवहन क्षेत्र के विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत है। बढ़ती हवाई यात्रा, मजबूत अवसंरचना और सस्ती विमानन सेवाओं के कारण भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक विमानन उद्योग में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।