विश्व हाथी दिवस पर भारत ने संरक्षण और सह-अस्तित्व पर दिया जोर

विश्व हाथी दिवस पर भारत ने संरक्षण और सह-अस्तित्व पर दिया जोर

12 अगस्त 2026 को विश्व हाथी दिवस के अवसर पर भारत ने हाथियों के संरक्षण, उनके आवास की सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। देश में हाथी केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि वन पारिस्थितिकी, जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। भारत में विश्व की जंगली एशियाई हाथियों की लगभग 60 प्रतिशत आबादी पाई जाती है, इसलिए यह संरक्षण प्रयास वैश्विक स्तर पर भी अहम है।

हाथी संरक्षण क्यों है महत्वपूर्ण

एशियाई हाथी को IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। यह प्रजाति दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया की मूल निवासी है और भारत में इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत सुरक्षा प्राप्त है। हाथियों की मौजूदगी स्वस्थ वन तंत्र का संकेत मानी जाती है, क्योंकि वे बड़े भू-भाग में विचरण करते हैं और वनस्पति के प्राकृतिक संतुलन में भूमिका निभाते हैं।

विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य हाथियों की सुरक्षा, उनके आवास की निरंतरता तथा मनुष्य और वन्यजीव के बीच सह-अस्तित्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।

भारत में हाथी रिजर्व और कॉरिडोर

भारत ने हाथी संरक्षण को केवल प्रजाति-आधारित नहीं, बल्कि परिदृश्य-आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है। देश में वर्तमान में 33 हाथी रिजर्व 14 राज्यों में फैले हुए हैं। इसके साथ ही 150 हाथी कॉरिडोर वैज्ञानिक रूप से सत्यापित किए जा चुके हैं, जो हाथियों के एक वनखंड से दूसरे वनखंड तक सुरक्षित आवागमन के लिए जरूरी हैं।

हाथी कॉरिडोर संकरी प्राकृतिक कड़ियाँ होती हैं, जिनके जरिए हाथी बड़े जंगलों के बीच आवाजाही करते हैं। इन मार्गों की सुरक्षा इसलिए जरूरी है, क्योंकि इनके बाधित होने पर हाथी मानव बस्तियों, खेतों और सड़कों की ओर बढ़ सकते हैं।

मानव-हाथी संघर्ष और सरकारी उपाय

मानव-हाथी संघर्ष तब बढ़ता है जब भूमि, फसल, पानी या आवागमन के स्थान को लेकर मनुष्य और हाथियों के बीच टकराव होता है। ऐसे मामलों में आबादी की निगरानी, आवास प्रबंधन और स्थानीय प्रतिक्रिया तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

केंद्र सरकार की प्रोजेक्ट एलीफेंट योजना 1992 में शुरू की गई थी। यह एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य हाथियों का संरक्षण, उनके आवास की रक्षा और मानव-हाथी संघर्ष को कम करना है। यह योजना राज्यों को हाथियों की संख्या पर निगरानी, कॉरिडोर संरक्षण और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई में सहायता देती है।

कुछ राज्यों ने स्थानीय स्तर पर भी नवाचार किए हैं। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश में वन्यजीव प्रतिक्रिया और संघर्ष-नियंत्रण के लिए प्रशिक्षित कुमकी हाथियों और HANUMAN टीमों का उपयोग किया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • विश्व हाथी दिवस हर साल 12 अगस्त को मनाया जाता है।
  • भारत में 33 हाथी रिजर्व 14 राज्यों में फैले हुए हैं।
  • देश में 150 हाथी कॉरिडोर वैज्ञानिक रूप से सत्यापित किए जा चुके हैं।
  • प्रोजेक्ट एलीफेंट की शुरुआत 1992 में एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में हुई थी।

हाथी संरक्षण का मुद्दा केवल वन्यजीव प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वन, जल, भूमि उपयोग और स्थानीय समुदायों के बीच संतुलन से भी जुड़ा है। भारत की भूमिका इस प्रजाति के भविष्य के लिए इसलिए निर्णायक मानी जाती है, क्योंकि वैश्विक जंगली एशियाई हाथी आबादी का बड़ा हिस्सा यहीं मौजूद है।

Originally written on August 12, 2026 and last modified on August 12, 2026.

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