गंगा बाढ़-मैदान नियमों में नया ढांचा, निर्माण पर अब जोनवार नियंत्रण
केंद्र सरकार ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के बाढ़-मैदान से जुड़े नियमों को नए सिरे से परिभाषित किया है। जल शक्ति मंत्रालय ने 7 अगस्त 2026 को River Ganga (Rejuvenation, Protection and Management) Authorities (Second Amendment) Order, 2026 जारी किया, जिसे 10 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इस संशोधन के बाद गंगा तंत्र में निर्माण गतिविधियों के लिए एक समान प्रतिबंध की जगह जोनवार नियामक व्यवस्था लागू हो गई है।
बाढ़-मैदान के लिए पहली बार स्पष्ट जोनिंग
संशोधन की सबसे अहम बात यह है कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के लिए पहली बार “Active Floodplain” की परिभाषा दी गई है। इसमें वे क्षेत्र शामिल होंगे जो पांच साल में एक बार आने वाली बाढ़ में डूबते हैं। इस क्षेत्र में निर्माण पर सख्त रोक बरकरार रखी गई है, हालांकि धार्मिक आयोजनों जैसी कुछ अस्थायी और सीमित संरचनाओं को अपवाद के रूप में अनुमति दी गई है।
इसके साथ ही सरकार ने बाढ़-मैदान को तीन हिस्सों में बांटकर नियमन की नई व्यवस्था बनाई है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि हर क्षेत्र में एक जैसी रोक नहीं होगी, बल्कि बाढ़ की आवृत्ति और जोखिम के आधार पर अनुमति तय की जाएगी।
रेगुलेटरी और वार्निंग जोन का नया प्रावधान
नए आदेश में “Regulatory Zone” उन इलाकों के लिए बनाया गया है जो 5 से 25 साल में एक बार बाढ़ से प्रभावित होते हैं। इस जोन में निर्माण तभी संभव होगा जब संबंधित प्राधिकरण से आवश्यक मंजूरी मिल जाए।
इसी तरह “Warning Zone” उन बाहरी क्षेत्रों के लिए तय किया गया है जहां 25 से 100 साल की अवधि में दुर्लभ बाढ़ का जोखिम रहता है। यहां भी निर्माण गतिविधियां पूरी तरह मुक्त नहीं होंगी, बल्कि उन्हें मंजूरी आधारित व्यवस्था के तहत ही आगे बढ़ाया जा सकेगा।
इस बदलाव का उद्देश्य नदी के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र को बचाते हुए विकास कार्यों को नियंत्रित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़-मैदान की वैज्ञानिक पहचान होने से प्रशासन को जोखिम वाले इलाकों में बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है।
2016 के सख्त प्रतिबंध से नई मंजूरी-आधारित व्यवस्था तक
मूल 2016 आदेश में बाढ़-मैदान क्षेत्र के लिए एक व्यापक “no-construction” प्रावधान था। 2026 के संशोधन ने उस एकसमान रोक को हटाकर एक स्तरित, अनुमति-आधारित नियामक ढांचा बना दिया है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे 2016 के कानून में मौजूद कानूनी असंगतियों को ठीक करने वाला कदम बताया है।
यह ढांचा River Ganga (Rejuvenation, Protection and Management) Authorities व्यवस्था से जुड़ा है, जो गंगा संरक्षण के प्रशासनिक और कानूनी ढांचे का हिस्सा है। यह व्यवस्था National Mission for Clean Ganga के तहत काम करती है, जो Namami Gange कार्यक्रम का नोडल मिशन है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- गंगा एक trans-boundary river system है, जो भारत और बांग्लादेश से होकर बहती है।
- Floodplain नदी के किनारे का वह निचला क्षेत्र होता है, जो समय-समय पर बाढ़ में डूब सकता है।
- Return period हाइड्रोलॉजी का शब्द है, जो किसी निश्चित तीव्रता वाली बाढ़ के औसत अंतराल को दर्शाता है।
- National Mission for Clean Ganga नमामि गंगे के तहत नदी पुनर्जीवन का प्रमुख कार्यक्रम है।
नए आदेश के साथ गंगा के बाढ़-मैदान प्रबंधन में अब जोखिम-आधारित और जोनवार दृष्टिकोण अपनाया गया है। इससे संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देती है।