गुजरात में एशिया का पहला डेजर्ट नाइट सफारी प्रोजेक्ट
गुजरात के बनासकांठा जिले के जूना देसा में डेजर्ट जूलॉजिकल पार्क और नाइट सफारी को मंजूरी मिल गई है। करीब 103 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर बनने वाला यह प्रोजेक्ट एशिया का पहला डेजर्ट-थीम्ड ड्राइव-थ्रू नाइट सफारी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह योजना राज्य में वन्यजीव पर्यटन, संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा के नए केंद्र के रूप में देखी जा रही है।
जूना देसा में बनेगा अनोखा वन्यजीव परिसर
यह परियोजना गुजरात वन विभाग के तहत विकसित की जाएगी। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने 12 अगस्त 2026 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। जूना देसा उत्तर गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित है, जो अपने शुष्क और अर्ध-शुष्क भूगोल के कारण डेजर्ट-थीम आधारित परियोजना के लिए उपयुक्त माना गया है।
परियोजना का कुल अनुमानित बजट 542.14 करोड़ रुपये है। इसमें एक अलग डे-जू और पांच समर्पित नाइट सफारी एनक्लोजर बनाए जाएंगे। नाइट सफारी का उद्देश्य सूर्यास्त के बाद सक्रिय होने वाली प्रजातियों को नियंत्रित वातावरण में देखने की सुविधा देना है।
कौन-कौन से जीव होंगे शामिल
इस पार्क में लगभग 83 प्रजातियों के करीब 2,700 पशु-पक्षियों को रखने की योजना है। इनमें भारतीय, विदेशी और पक्षी प्रजातियां शामिल होंगी। संग्रह में चीतल नहीं, बल्कि शुष्क क्षेत्र से जुड़ी भारतीय प्रजातियां जैसे चिंकारा, ब्लैकबक और भारतीय जंगली गधा शामिल किए जाने की योजना है।
विदेशी प्रजातियों में अफ्रीकी चीता, जिराफ और ज़ेब्रा, जबकि ऑस्ट्रेलियाई जीवों में कंगारू और इमू को शामिल करने की योजना है। इस तरह यह पार्क केवल प्रदर्शन स्थल नहीं, बल्कि विविध जैविक प्रजातियों के अध्ययन और संरक्षण का केंद्र भी बनेगा।
संरक्षण, शिक्षा और पर्यावरणीय ढांचा
परियोजना में पर्यावरणीय स्थिरता पर भी जोर दिया गया है। इसमें वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा, सीवेज ट्रीटमेंट और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी। इससे पार्क का संचालन अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की कोशिश की जाएगी।
इसे वन्यजीव संरक्षण प्रजनन, बचाव, पुनर्वास और पर्यावरण शिक्षा के केंद्र के रूप में भी विकसित करने की योजना है। ऐसे संस्थान उन प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं जिनके संरक्षण, प्रजनन और पुनर्वास की विशेष जरूरत होती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण भारत में चिड़ियाघरों के नियमन के लिए वैधानिक संस्था है।
- यह प्राधिकरण वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत काम करता है।
- बनासकांठा जिला उत्तर गुजरात में है और राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है।
- चिंकारा, ब्लैकबक और भारतीय जंगली गधा शुष्क एवं अर्ध-शुष्क आवासों से जुड़ी संरक्षित भारतीय प्रजातियां हैं।
अगर यह परियोजना तय समय पर आगे बढ़ती है, तो गुजरात देश में डेजर्ट-थीम्ड वन्यजीव पर्यटन का एक नया मॉडल पेश कर सकता है। इससे राज्य की पर्यटन पहचान के साथ-साथ संरक्षण और जन-जागरूकता को भी नई दिशा मिलने की संभावना है।