सरसों संसाधनों से मिले लाभांश का बड़ा बंटवारा, राज्यों को संरक्षण के लिए नई राशि
देश की जैव विविधता से जुड़े संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभ का एक बड़ा हिस्सा अब राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंचेगा। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने 13 अगस्त 2026 को जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत सरसों के आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त 15.52 करोड़ रुपये की Access and Benefit Sharing (ABS) राशि जारी की। यह राशि M/s Pioneer Overseas Corporation से दस व्यावसायिक संकर किस्मों के विकास के लिए प्राप्त हुई थी।
ABS व्यवस्था क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है
Access and Benefit Sharing जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत एक कानूनी व्यवस्था है, जिसके जरिए जैविक संसाधनों और उनसे जुड़ी पारंपरिक जानकारी के उपयोग से होने वाले मौद्रिक और गैर-मौद्रिक लाभ साझा किए जाते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जैव संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से मिलने वाला लाभ केवल उपयोगकर्ता तक सीमित न रहे, बल्कि संरक्षण और स्थानीय हितों को भी समर्थन दे।
राष्ट्रीय स्तर पर NBA वही वैधानिक संस्था है जो भारत में जैविक संसाधनों तक पहुंच को नियंत्रित करती है और लाभ-साझेदारी की व्यवस्थाओं को मंजूरी देती है। इस तरह की राशि का उपयोग जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय अभिलेखों के अद्यतन और समुदाय-आधारित संरक्षण कार्यों में किया जाता है।
सरसों संसाधनों से जुड़ा यह मामला कैसे बना
इस प्रकरण में लाभांश सरसों, यानी Brassica juncea, के आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से जुड़ा है। सरसों भारत की एक महत्वपूर्ण तिलहन फसल है और कृषि अर्थव्यवस्था में इसकी अहम भूमिका है। NBA के अनुसार, यह राशि दस व्यावसायिक संकर किस्मों के विकास से संबंधित थी।
विशेष बात यह रही कि इन किस्मों के लिए प्रयुक्त parental lines खुले बाजार से प्राप्त की गई थीं। इसलिए किसी एक समुदाय स्रोत की सीधी पहचान संभव नहीं थी। इसी कारण विशेषज्ञ समिति ने वितरण के लिए अलग नियम तैयार किए और सरसों की खेती के क्षेत्रफल के आधार पर राशि बांटने का निर्णय लिया। इस क्षेत्रफल संबंधी डेटा के लिए ICAR-Indian Institute of Rapeseed-Mustard Research, भरतपुर, राजस्थान की जानकारी का उपयोग किया गया।
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कैसे बंटी राशि
NBA ने यह राशि 26 राज्य जैव विविधता बोर्डों और तीन केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के बीच बांटने की मंजूरी दी। वितरण में राजस्थान को सबसे बड़ा हिस्सा मिला, क्योंकि सरसों उत्पादन और खेती के क्षेत्रफल के आधार पर उसका योगदान सबसे अधिक माना गया।
प्रमुख आवंटन इस प्रकार रहा: राजस्थान को 6.43 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश को 2.28 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 1.86 करोड़ रुपये, हरियाणा को 1.21 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल को 1.10 करोड़ रुपये मिले। NBA ने यह भी बताया कि इस भुगतान के बाद उसकी कुल ABS रिलीज 182.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। पिछले 12 महीनों में 116.22 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जैव विविधता अधिनियम, 2002 भारत में जैविक संसाधनों के संरक्षण, सतत उपयोग और लाभ-साझेदारी का कानूनी ढांचा देता है।
- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) देश में जैविक संसाधनों तक पहुंच और ABS व्यवस्था को नियंत्रित करने वाली शीर्ष वैधानिक संस्था है।
- सरसों का वैज्ञानिक नाम Brassica juncea है और यह भारत की प्रमुख तिलहन फसलों में शामिल है।
- ABS राशि का उपयोग आम तौर पर जैव विविधता संरक्षण, People’s Biodiversity Registers के अद्यतन और स्थानीय विरासत स्थलों के रखरखाव में किया जाता है।
यह निर्णय दिखाता है कि जैव संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से मिलने वाला लाभ केवल उद्योग तक सीमित न रहकर संरक्षण और स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन में भी लौटे।