भारत ने 2047 के आर्थिक लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए व्यापार समझौतों का दायरा बढ़ाया
भारत ने वर्ष 2026 में यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए), कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक समझौतों का विस्तार किया है। ये समझौते भारत की दीर्घकालिक व्यापार रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक देश को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। सरकार का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौते और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुक्त व्यापार समझौता क्या होता है?
मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) दो या अधिक देशों अथवा आर्थिक समूहों के बीच किया जाने वाला ऐसा समझौता होता है, जिसके तहत वस्तुओं पर लगाए जाने वाले सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) को कम या समाप्त किया जाता है। कई मामलों में ऐसे समझौते सेवाओं, निवेश, बौद्धिक संपदा और बाजार पहुंच से जुड़े नियमों को भी सरल बनाते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना होता है।
भारत-यूरोपीय संघ एफटीए
भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी 2026 को लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत भारत की 70.4 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को तत्काल शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान की गई है। यह व्यवस्था भारत के यूरोपीय संघ को होने वाले कुल निर्यात मूल्य के 90.7 प्रतिशत हिस्से को कवर करती है। समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 99 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। इससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की उम्मीद है।
न्यूजीलैंड के साथ समझौता
भारत और न्यूजीलैंड ने 27 अप्रैल 2026 को मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में पूर्ण शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। दूसरी ओर, भारत लगभग 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में उदारीकरण करेगा, जो दोनों देशों के कुल द्विपक्षीय व्यापार के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। यह समझौता कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के लिए नए अवसर प्रदान कर सकता है।
ईएफटीए देशों के साथ निवेश सहयोग
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुए समझौते में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। इस समूह ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश को सुगम बनाने तथा 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने में सहयोग का वादा किया है। यह समझौता भारत में औद्योगिक विकास और विदेशी निवेश को नई गति देने वाला माना जा रहा है।
कनाडा के साथ सीईपीए वार्ता
भारत और कनाडा ने 2 मार्च 2026 को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) पर वार्ता शुरू की। सीईपीए सामान्य एफटीए की तुलना में अधिक व्यापक होता है और इसमें वस्तुओं के अलावा सेवाएं, निवेश, बौद्धिक संपदा और नियामकीय सहयोग जैसे विषय भी शामिल होते हैं। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
भारत का व्यापार प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 860.09 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.22 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में आयात 6.47 प्रतिशत बढ़कर लगभग 970 अरब डॉलर हो गया। इसके परिणामस्वरूप भारत का व्यापार घाटा 119.30 अरब डॉलर दर्ज किया गया। अप्रैल 2026 में वस्तु निर्यात लगभग 14 प्रतिशत बढ़कर 43.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो निर्यात क्षेत्र में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
2047 का आर्थिक लक्ष्य
भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक देश को 30 से 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निर्यात को 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए व्यापार समझौते भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेंगे और देश की आर्थिक वृद्धि को गति देंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मुक्त व्यापार समझौता (FTA) व्यापारिक शुल्कों को कम या समाप्त करने के लिए किया जाता है।
- भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी 2026 को एफटीए पर हस्ताक्षर किए।
- यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं।
- व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सामान्य एफटीए से अधिक व्यापक होता है।
- भारत का निर्यात लक्ष्य वर्ष 2047 तक 10 ट्रिलियन डॉलर निर्धारित किया गया है।
- सरकार ने वर्ष 2047 तक 30-35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा है।
भारत द्वारा हाल के वर्षों में किए गए व्यापार समझौते देश की वैश्विक आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन समझौतों से निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। यदि इनका प्रभावी क्रियान्वयन किया जाता है, तो वे भारत को वर्ष 2047 तक विकसित और आर्थिक रूप से मजबूत राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।