आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में संजय लोहिया बने केंद्र सरकार के नामित निदेशक
केंद्र सरकार ने 11 जून 2026 को वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव संजय लोहिया को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय बोर्ड में निदेशक के रूप में नामित किया है। उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। संजय लोहिया ने आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में नागराजू मद्दिराला का स्थान लिया है। यह नियुक्ति देश की वित्तीय और बैंकिंग प्रणाली के संचालन में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आरबीआई का केंद्रीय बोर्ड बैंक की सर्वोच्च नीति-निर्धारण संस्था है।
वित्तीय सेवा विभाग की भूमिका
वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। यह विभाग बैंकिंग, बीमा, पेंशन और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े प्रशासनिक एवं नीतिगत मामलों का संचालन करता है। डीएफएस का सचिव भारत सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक पदों में से एक माना जाता है। विभाग का मुख्य उद्देश्य वित्तीय संस्थानों के सुचारु संचालन, वित्तीय समावेशन और बैंकिंग क्षेत्र के विकास को सुनिश्चित करना है।
आरबीआई का केंद्रीय बोर्ड क्या है?
भारतीय रिजर्व बैंक का केंद्रीय बोर्ड आरबीआई की सर्वोच्च शासी संस्था है, जिसका गठन भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत किया गया है। यह बोर्ड बैंक की नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय दिशा-निर्देशों की निगरानी करता है। केंद्रीय बोर्ड में एक गवर्नर, अधिकतम चार उप-गवर्नर, स्थानीय बोर्डों से चार निदेशक और केंद्र सरकार द्वारा नामित दस निदेशक शामिल होते हैं। यह संरचना सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच समन्वय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का केंद्रीय बोर्ड
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का भी एक केंद्रीय बोर्ड होता है, जिसका गठन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम, 1955 के अंतर्गत किया गया है। इस बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा नामित निदेशकों के अलावा विभिन्न हितधारक समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य शामिल होते हैं। एसबीआई का केंद्रीय बोर्ड बैंक की नीतियों, संचालन और रणनीतिक निर्णयों की देखरेख करता है। भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक होने के कारण इसकी भूमिका वित्तीय प्रणाली में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पूर्व में हुई महत्वपूर्ण नियुक्तियां
इससे पहले 17 फरवरी 2022 को केंद्र सरकार ने तत्कालीन वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय मल्होत्रा को आरबीआई और एसबीआई दोनों के केंद्रीय बोर्डों में निदेशक के रूप में नामित किया था। उन्होंने उन पदों पर देबाशीष पांडा का स्थान लिया था। इस प्रकार डीएफएस सचिवों की आरबीआई और एसबीआई जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों के बोर्ड में नियुक्ति सरकार और वित्तीय संस्थानों के बीच नीति समन्वय को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
भारतीय वित्तीय प्रणाली में आरबीआई का महत्व
आरबीआई देश का केंद्रीय बैंक है, जो मौद्रिक नीति निर्माण, मुद्रा जारी करने, बैंकिंग प्रणाली के विनियमन और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने का कार्य करता है। केंद्रीय बोर्ड के सदस्य इन महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित नीतिगत निर्णयों में योगदान देते हैं। संजय लोहिया की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बीच विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है और वित्तीय क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधारों पर काम चल रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत हुई थी।
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का गठन 1 जुलाई 1955 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम, 1955 के तहत किया गया था।
- वित्तीय सेवा विभाग वित्त मंत्रालय के अंतर्गत बैंकिंग, बीमा और पेंशन संबंधी मामलों का संचालन करता है।
- आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा दस निदेशक नामित किए जा सकते हैं।
- केंद्रीय बैंक की नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों की निगरानी आरबीआई का केंद्रीय बोर्ड करता है।
संजय लोहिया की आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में नियुक्ति भारतीय वित्तीय प्रशासन में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक के बीच समन्वय को और मजबूती मिलने की उम्मीद है, जो देश की बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक है।