विशाखापत्तनम पोर्ट में 335 करोड़ की आंतरिक फ्लाईओवर परियोजना से कार्गो आवाजाही होगी तेज

विशाखापत्तनम पोर्ट में 335 करोड़ की आंतरिक फ्लाईओवर परियोजना से कार्गो आवाजाही होगी तेज

विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी में कार्गो आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 334.89 करोड़ रुपये की आंतरिक फ्लाईओवर परियोजना को मंजूरी दी गई है। यह 3.584 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर कन्वेंट जंक्शन से डॉक एरिया तक बनाया जाएगा और इसका उद्देश्य बंदरगाह परिसर के भीतर सड़क तथा रेल यातायात को अलग करना है।

परियोजना का दायरा और संरचना

यह कॉरिडोर बंदरगाह के भीतर एक आंतरिक संपर्क मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि भारी वाहनों और माल ढुलाई से जुड़ी आवाजाही बिना रुकावट के हो सके। परियोजना में सिविल वर्क, विद्युत कार्य, उपयोगिताओं का स्थानांतरण, सुरक्षा उपकरणों की स्थापना और निर्माण के बाद पांच वर्षों तक रखरखाव शामिल है।

ऐसे ढांचागत कार्य बंदरगाहों में केवल आवागमन नहीं, बल्कि संचालन की दक्षता भी बढ़ाते हैं। जब मालवाहक वाहनों को बार-बार लेवल क्रॉसिंग पर रुकना पड़े, तो समय और ईंधन दोनों की हानि होती है। इसी समस्या को कम करने के लिए यह फ्लाईओवर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लेवल क्रॉसिंग की बाधा होगी कम

प्रस्तावित फ्लाईओवर बंदरगाह क्षेत्र की नौ रेलवे लेवल क्रॉसिंग को बायपास करेगा, जहां औसतन हर दिन लगभग 18 बार गेट बंद होते हैं। बंदरगाह जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसी बाधाएं माल ढुलाई की गति को प्रभावित करती हैं और ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति भी पैदा करती हैं।

सड़क और रेल यातायात के अलग होने से न केवल संचालन अधिक सुरक्षित होगा, बल्कि बंदरगाह के भीतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भी अधिक व्यवस्थित बनेगा। यह विशेष रूप से उन बंदरगाहों के लिए अहम है जहां कार्गो मूवमेंट लगातार और बड़े पैमाने पर होता है।

मंजूरी, समयसीमा और बंदरगाह की भूमिका

इस परियोजना को डेलीगेटेड इन्वेस्टमेंट बोर्ड की जांच के बाद केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंजूरी दी। बोर्ड की अध्यक्षता बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव ने की थी। निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू होने के बाद 30 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

विशाखापत्तनम पोर्ट भारत के पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाहों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में यहां 91.17 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो हैंडल किया गया, जो इसकी परिचालन क्षमता और महत्व को दर्शाता है। बंदरगाहों में कार्गो थ्रूपुट किसी पोर्ट की माल संभालने की क्षमता का प्रमुख संकेतक माना जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • विशाखापत्तनम पोर्ट भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक प्रमुख बंदरगाह है।
  • भारत में बंदरगाह विकास के लिए पोत, परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय नोडल मंत्रालय है।
  • एलिवेटेड कॉरिडोर का उपयोग भीड़भाड़ कम करने और यातायात प्रवाह सुधारने के लिए किया जाता है।
  • कार्गो थ्रूपुट किसी बंदरगाह की माल ढुलाई क्षमता का महत्वपूर्ण मानक है।

यह परियोजना बंदरगाह के भीतर माल ढुलाई को अधिक तेज, सुरक्षित और निर्बाध बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे विशाखापत्तनम पोर्ट की परिचालन दक्षता और लॉजिस्टिक क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Originally written on August 12, 2026 and last modified on August 12, 2026.

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