पोखरण में दिखेगी भारत की स्वदेशी ड्रोन ताकत
भारतीय वायुसेना के लिए सितंबर 2026 में राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में स्वदेशी मानवरहित प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शन में लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले मानवरहित विमान, स्वार्म ड्रोन तकनीक, एक्सपेंडेबल सर्विलांस ड्रोन, लॉजिस्टिक्स ड्रोन और वन-वे अटैक ड्रोन शामिल होंगे। यह आयोजन भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमता और आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका को सामने लाता है।
पोखरण क्यों है खास
पोखरण फायरिंग रेंज राजस्थान में स्थित एक प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्र है और पाकिस्तान सीमा से लगभग 270 किलोमीटर दूर है। भारतीय सशस्त्र बल यहां लंबे समय से फील्ड ट्रायल, हथियार परीक्षण और सैन्य अभ्यास करते रहे हैं। इसी वजह से यह स्थान नई रक्षा तकनीकों के परीक्षण और प्रदर्शन के लिए उपयुक्त माना जाता है।
मानवरहित प्रणालियों की बढ़ती भूमिका
आधुनिक सैन्य अभियानों में मानवरहित प्रणालियों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इनमें मानवरहित हवाई वाहन, लोइटरिंग म्यूनिशन और लॉजिस्टिक्स ड्रोन शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, सामान पहुंचाने, घायल सैनिकों को निकालने और हमले जैसे मिशनों में किया जाता है। स्वार्म ड्रोन तकनीक कई ड्रोन को एक साथ समन्वित तरीके से काम करने की क्षमता देती है, जिससे उनकी प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
Counter-UAS क्षमता पर भी फोकस
भारतीय वायुसेना ने अगस्त 2026 में पोखरण में रोटर क्लैप-III नामक एक सप्ताह लंबा हेलीकॉप्टर प्रशिक्षण अभ्यास भी पूरा किया था। इस अभ्यास का मुख्य फोकस Counter-Unmanned Aerial Systems यानी Counter-UAS क्षमता पर था, जिसमें दुश्मन ड्रोन की पहचान, ट्रैकिंग और निष्क्रिय करने की तकनीकें शामिल होती हैं। यह संकेत है कि भारत केवल ड्रोन विकसित ही नहीं कर रहा, बल्कि उनसे निपटने की क्षमता भी मजबूत कर रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पोखरण राजस्थान में स्थित है और भारत के प्रमुख सैन्य परीक्षण स्थलों में गिना जाता है।
- लॉन्ग-रेंज अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स कुछ विन्यासों में 1,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक काम कर सकते हैं।
- लोइटरिंग ड्रोन को रक्षा क्षेत्र में वन-वे अटैक ड्रोन भी कहा जाता है।
- Counter-UAS का पूरा नाम Counter-Unmanned Aerial Systems है।
पिछले परीक्षणों से क्या संकेत मिलता है
भारतीय सेना ने 31 मई 2025 को पोखरण में सिम्युलेटेड कॉम्बैट परिस्थितियों के तहत फील्ड ट्रायल किए थे। इन परीक्षणों में स्वदेशी मानवरहित प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर समाधानों को परखा गया था। इससे स्पष्ट है कि भारत भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और काउंटर-ड्रोन तकनीक को एक साथ विकसित कर रहा है।
पोखरण में होने वाला यह प्रदर्शन भारतीय रक्षा अनुसंधान और स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह न केवल वायुसेना की जरूरतों से जुड़ा है, बल्कि बदलते युद्ध परिदृश्य में भारत की तकनीकी तैयारी को भी दर्शाता है।