भारतीय वायुसेना के लिए 60 परिवहन विमानों की बड़ी खरीद योजना
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 60 बहुउद्देशीय परिवहन विमानों की खरीद के लिए 12 अगस्त 2026 को प्रस्ताव आमंत्रण जारी किया है। इस परियोजना का अनुमानित मूल्य लगभग 1 लाख करोड़ रुपये बताया गया है। यह कदम न केवल वायुसेना की परिवहन क्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम है, बल्कि इसमें घरेलू उत्पादन और रक्षा उद्योग की भागीदारी को भी केंद्रीय स्थान दिया गया है।
क्यों अहम है यह परिवहन विमान कार्यक्रम
बहुउद्देशीय परिवहन विमान सैन्य अभियानों में सैनिकों की आवाजाही, माल ढुलाई, हवाई आपूर्ति और लॉजिस्टिक सहायता के लिए इस्तेमाल होते हैं। भारतीय वायुसेना इस श्रेणी में 18 टन से 30 टन तक की कार्गो क्षमता वाले विमानों की तलाश कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सोवियत मूल के एंटोनोव An-32 बेड़े को चरणबद्ध तरीके से बदलना है, जो लंबे समय से वायुसेना की परिवहन जरूरतों का हिस्सा रहा है।
यह खरीद योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल विमान खरीदना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए उत्पादन, रखरखाव और तकनीकी सहायता का ढांचा भी तैयार किया जा रहा है।
घरेलू उद्योग को मिलेगा बड़ा अवसर
प्रस्तावित ढांचे के अनुसार लगभग 20 प्रतिशत विमान तैयार उड़ान स्थिति में खरीदे जाएंगे, जबकि शेष 80 प्रतिशत का निर्माण भारत में संयुक्त उद्यमों के जरिए किया जाएगा। शुरुआती चरण में स्वदेशी सामग्री की न्यूनतम आवश्यकता 40 प्रतिशत रखी गई है, जिसे आगे बढ़ाकर 60 प्रतिशत से अधिक किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में भारतीय कंपनियों की भूमिका प्रमुख रहेगी। बोली प्रक्रिया में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, महिंद्रा ग्रुप, अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और रिलायंस डिफेंस जैसे नाम शामिल हैं। साथ ही, दीर्घकालिक सैन्य विमानन अनुबंधों की तरह इसमें देश में उत्पादन लाइन और एमआरओ केंद्र स्थापित करने की भी योजना है।
कौन-कौन से विमान होड़ में हैं
इस प्रतिस्पर्धा में अलग-अलग वैश्विक प्लेटफॉर्म सामने आए हैं। महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की एम्ब्रेयर के साथ मिलकर C-390 Millennium पेश करने की साझेदारी की है। वहीं टाटा ने अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ मिलकर C-130J Super Hercules को प्रस्तावित किया है।
एयरबस का A400M इस प्रतिस्पर्धा से बाहर रहने की संभावना है, क्योंकि इसकी 37 टन पेलोड क्षमता भारतीय वायुसेना की तय सीमा से अधिक है। इससे स्पष्ट है कि चयन केवल क्षमता के आधार पर नहीं, बल्कि तय परिचालन जरूरतों और औद्योगिक शर्तों के अनुसार होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एंटोनोव An-32 एक ट्विन-टर्बोप्रॉप सैन्य परिवहन विमान है, जिसका उपयोग भारतीय वायुसेना करती रही है।
- MRO का अर्थ Maintenance, Repair and Overhaul है, यानी विमान की मरम्मत, रखरखाव और जीवनचक्र सहायता।
- C-130J Super Hercules लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित सैन्य परिवहन विमान है और कई देशों की वायुसेनाओं में उपयोग होता है।
- C-390 Millennium ब्राजील की एम्ब्रेयर द्वारा विकसित जेट-चालित सैन्य परिवहन विमान है।
यह परियोजना भारत की रक्षा खरीद नीति में विदेशी तकनीक और घरेलू निर्माण के संयोजन को और मजबूत करती है। साथ ही, यह वायुसेना की रणनीतिक परिवहन क्षमता को अगले चरण में ले जाने वाली एक बड़ी पहल मानी जा रही है।