भारत-मलेशिया वायु अभ्यास से बढ़ी संयुक्त युद्ध क्षमता

भारत-मलेशिया वायु अभ्यास से बढ़ी संयुक्त युद्ध क्षमता

भारतीय वायुसेना और रॉयल मलेशियन वायुसेना ने 10 अगस्त 2026 को द्विपक्षीय वायु अभ्यास उदारा शक्ति 2026 शुरू किया। मलेशिया के सुबांग एयर बेस पर होने वाला यह पांच दिवसीय अभ्यास 14 अगस्त तक चलेगा। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों वायु सेनाओं के बीच समन्वय, संचालन क्षमता और संयुक्त कार्रवाई की तैयारी को मजबूत करना है।

सुबांग एयर बेस पर औपचारिक शुरुआत

अभ्यास का उद्घाटन सुबांग एयर बेस स्थित एयर वारफेयर सेंटर में किया गया। रॉयल मलेशियन वायुसेना की ओर से अभ्यास निदेशक कर्नल शमसुल शाहरीन बिन ईसा और भारतीय वायुसेना की ओर से ग्रुप कैप्टन परिजात झा ने इसकी शुरुआत की। उद्घाटन समारोह में भारतीय रक्षा सलाहकार कर्नल प्रवीण सुकुमारन भी मौजूद रहे।

इस अभ्यास में दोनों वायु सेनाओं के कुल 83 कर्मी शामिल हैं। द्विपक्षीय अभ्यासों में इस तरह की भागीदारी केवल औपचारिकता नहीं होती, बल्कि इससे वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में तालमेल और निर्णय-क्षमता का परीक्षण किया जाता है।

राफेल, सी-17 और सु-30एमकेएम की भागीदारी

भारतीय वायुसेना ने इस अभ्यास में अपने नंबर 101 स्क्वाड्रन के चार राफेल लड़ाकू विमान और नंबर 81 स्क्वाड्रन के दो सी-17 ग्लोबमास्टर III रणनीतिक परिवहन विमान तैनात किए हैं। राफेल फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन द्वारा विकसित एक ट्विन-इंजन, मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जबकि सी-17 लंबी दूरी की सैन्य ढुलाई और भारी उपकरणों की आवाजाही के लिए उपयोग किया जाता है।

मलेशियाई वायुसेना की ओर से नंबर 12 स्क्वाड्रन के दो सु-30एमकेएम लड़ाकू विमान, नंबर 18 स्क्वाड्रन के दो एफ/ए-18डी लड़ाकू विमान और नंबर 8 स्क्वाड्रन का एक ए400एम परिवहन विमान शामिल है। सु-30एमकेएम, सुखोई सु-30 परिवार का मलेशियाई संस्करण है और बहु-भूमिका अभियानों में इस्तेमाल होता है।

संयुक्त प्रशिक्षण से क्या हासिल होगा

अभ्यास में जटिल एयर कॉम्बैट मैन्युवरिंग, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग और रणनीतिक एयरलिफ्ट जैसे विषय शामिल हैं। ये सभी आधुनिक वायु युद्ध और सैन्य लॉजिस्टिक्स के अहम हिस्से हैं। 13 अगस्त 2026 को सुबांग एयर बेस पर संयुक्त फील्ड ट्रेनिंग और विषय विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श भी जारी रहा।

ऐसे एक्सचेंज में दोनों पक्ष अपनी प्रक्रियाओं, रणनीतियों और संचालन पद्धतियों की तुलना करते हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म और अलग-अलग सैन्य प्रणालियाँ एक साझा मिशन में कैसे बेहतर तरीके से काम कर सकती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • उदारा शक्ति भारत और मलेशिया के बीच होने वाला द्विपक्षीय वायु अभ्यास है।
  • सुबांग एयर बेस मलेशिया में स्थित है और यहां एयर वारफेयर सेंटर भी है।
  • राफेल एक मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसे भारतीय वायुसेना कई भूमिकाओं में उपयोग करती है।
  • सी-17 ग्लोबमास्टर III लंबी दूरी की सैन्य ढुलाई और रणनीतिक एयरलिफ्ट के लिए इस्तेमाल होता है।

ऐसे अभ्यास भारत की वायु कूटनीति और परिचालन तैयारी दोनों को मजबूत करते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश भी जाता है कि भारत अपनी वायु शक्ति को साझेदार देशों के साथ बेहतर समन्वय के लिए लगातार उन्नत कर रहा है।

Originally written on August 13, 2026 and last modified on August 13, 2026.

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