भारत ने 2035-36 तक 100 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर का लक्ष्य तय किया
भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2035-36 तक 100 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया है। बढ़ती सौर और पवन ऊर्जा क्षमता के बीच बिजली आपूर्ति को स्थिर और विश्वसनीय बनाए रखने में पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर क्या है?
पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर जलविद्युत ऊर्जा भंडारण की एक आधुनिक प्रणाली है, जिसमें अलग-अलग ऊंचाई पर स्थित दो जलाशयों का उपयोग किया जाता है। जब बिजली की मांग कम होती है, तब अतिरिक्त बिजली की सहायता से पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय तक पम्प किया जाता है। वहीं, मांग बढ़ने पर यही पानी ऊपरी जलाशय से नीचे छोड़कर टर्बाइन चलाए जाते हैं, जिससे बिजली का उत्पादन होता है। यह प्रणाली बिजली ग्रिड को संतुलित रखने और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग में मदद करती है।
भारत की वर्तमान क्षमता और भविष्य की योजनाएं
दिसंबर 2025 तक भारत में 10 पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाएं संचालित थीं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 7.2 गीगावाट थी। इसके अतिरिक्त 10 नई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 11.6 गीगावाट है। वर्ष 2025 में भारत ने 4,267 मेगावाट नई जलविद्युत क्षमता जोड़ी। जनवरी 2026 तक देश की कुल स्थापित जलविद्युत क्षमता, जिसमें पम्प्ड स्टोरेज भी शामिल है, 50.91 गीगावाट दर्ज की गई, जबकि केवल पम्प्ड स्टोरेज की स्थापित क्षमता 7,175.6 मेगावाट रही।
जलविद्युत क्षमता और सरकारी निवेश
भारत की आर्थिक रूप से उपयोगी जलविद्युत क्षमता लगभग 1,48,701 मेगावाट आंकी गई है। इसके अतिरिक्त लघु जलविद्युत परियोजनाओं से 6,780 मेगावाट तथा पम्प्ड स्टोरेज की संभावित क्षमता लगभग 288 गीगावाट मानी गई है। सरकार ने वर्ष 2024 में जलविद्युत एवं पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए 12,461 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इस निवेश का उद्देश्य वर्ष 2031-32 तक 31 गीगावाट से अधिक नई क्षमता जोड़ना है।
ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड संतुलन में महत्व
सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में मौसम के अनुसार उतार-चढ़ाव होता है। ऐसे में पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाएं अतिरिक्त ऊर्जा को सुरक्षित रखने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम होती हैं। इससे बिजली ग्रिड की स्थिरता बढ़ती है, बिजली कटौती की संभावना घटती है और उपभोक्ताओं को अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है। यही कारण है कि भारत अपनी स्वच्छ ऊर्जा रणनीति में इस तकनीक को प्रमुख स्थान दे रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जिनके पास पम्प्ड स्टोरेज की सबसे अधिक संभावित क्षमता उपलब्ध है।
- अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना की लक्ष्य क्षमता 11,000 मेगावाट है।
- चीन की यारलुंग जांग्बो नदी पर प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना की नियोजित क्षमता 60,000 मेगावाट बताई गई है।
भारत का 100 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर लक्ष्य केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और भविष्य की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने की व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर यह लक्ष्य प्राप्त होता है, तो भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाएगा।