भारत ने 2031 तक 30 अरब डॉलर के समुद्री खाद्य निर्यात का लक्ष्य रखा
भारत ने वर्ष 2031 तक समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात को बढ़ाकर 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह घोषणा जून 2026 में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला के दौरान की गई। वर्तमान में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात लगभग 8.5 अरब डॉलर है, जिसे अगले कुछ वर्षों में तीन गुना से अधिक बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
भारत का समुद्री खाद्य निर्यात परिदृश्य
वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात 73,890.46 करोड़ रुपये अर्थात लगभग 8.45 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में कुल निर्यात मात्रा 19.72 लाख मीट्रिक टन दर्ज की गई। समुद्री खाद्य निर्यात में झींगा, विभिन्न प्रकार की मछलियां, मोलस्क और अन्य समुद्री उत्पाद शामिल हैं। इनमें झींगा भारत के समुद्री निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण उत्पाद बना हुआ है और वैश्विक बाजारों में इसकी मांग लगातार बनी हुई है।
निर्यात बढ़ाने की रणनीति
सरकार ने हाल ही में विकसित देशों के साथ संपन्न नौ मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाकर भारतीय समुद्री उत्पादों के लिए नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की योजना बनाई है। रणनीति का मुख्य फोकस उत्पाद गुणवत्ता सुधार, मूल्य संवर्धित उत्पादों के विकास और भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग पर रहेगा। इसके माध्यम से भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत करना चाहता है।
निर्यात प्रोत्साहन मिशन 2025-2031
समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए तैयार निर्यात प्रोत्साहन मिशन 2025-2031 में गुणवत्ता प्रमाणन और नियामकीय अनुपालन को विशेष महत्व दिया गया है। इस मिशन के अंतर्गत Aquaculture Stewardship Council (एएससी) और Best Aquaculture Practices (बीएपी) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने पर जोर दिया गया है। साथ ही आधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाओं और डिजिटल ट्रेसबिलिटी प्रणालियों का विकास भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी ढांचा
विश्व मत्स्य दिवस 2025 पर राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क की शुरुआत की गई थी। यह प्रणाली समुद्री खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में डिजिटल निगरानी और उत्पादों की पहचान सुनिश्चित करती है। इससे निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन करने और प्रीमियम बाजारों तक पहुंच प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। ट्रेसबिलिटी प्रणाली खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता विश्वास बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आधारभूत संरचना का विस्तार
सरकार समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बंदरगाहों पर कोल्ड-चेन अवसंरचना को भी मजबूत कर रही है। Visakhapatnam और Kochi जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर आधुनिक भंडारण और परिवहन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में गहरे समुद्र में मत्स्यन को बढ़ावा देने की योजना है, जिससे टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों का उत्पादन बढ़ाया जा सके।
आंध्र प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका
Andhra Pradesh भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में अग्रणी राज्य है। वर्ष 2025-26 में राज्य ने देश के कुल झींगा निर्यात में 66 प्रतिशत योगदान दिया। इसी अवधि में राज्य का जलीय कृषि उत्पादन 55.39 लाख टन रहा। इसके अलावा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत काकीनाडा में एक स्मार्ट और एकीकृत मत्स्य बंदरगाह को भी मंजूरी दी गई है, जिससे निर्यात क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत का विशेष आर्थिक क्षेत्र समुद्री आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक विस्तारित है।
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में मत्स्य विकास और जलीय कृषि आधुनिकीकरण के लिए की गई थी।
- एएससी का पूरा नाम एक्वाकल्चर स्टीवर्डशिप काउंसिल है।
- बीएपी का पूरा नाम बेस्ट एक्वाकल्चर प्रैक्टिसेज है।
भारत का 2031 तक 30 अरब डॉलर के समुद्री खाद्य निर्यात का लक्ष्य देश के मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र के लिए एक नई दिशा निर्धारित करता है। गुणवत्ता, तकनीक, अवसंरचना और वैश्विक बाजार विस्तार पर आधारित यह रणनीति भारत को विश्व के प्रमुख समुद्री खाद्य निर्यातकों में और मजबूत स्थिति दिलाने में सहायक हो सकती है।