छत्तीसगढ़ की सिंचाई पहल को केंद्र सरकार से राष्ट्रीय मान्यता
छत्तीसगढ़ की आधुनिक सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन मॉडल को 6 जून 2026 को केंद्र सरकार द्वारा विशेष मान्यता प्रदान की गई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को छत्तीसगढ़ के मॉडल का अध्ययन करने की सलाह दी है, ताकि सिंचाई दक्षता और जल उपयोग क्षमता को बेहतर बनाया जा सके। यह उपलब्धि राज्य के कृषि और जल संसाधन प्रबंधन क्षेत्र में किए गए नवाचारों की सफलता को दर्शाती है।
एम-सीएडीडब्ल्यूएम योजना क्या है?
मॉडर्नाइजेशन ऑफ कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (एम-सीएडीडब्ल्यूएम) योजना, Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana की एक उप-योजना है। इस योजना को 9 अप्रैल 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी। मार्च 2026 तक के लिए 1,600 करोड़ रुपये के प्रारंभिक बजट के साथ शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों के माध्यम से खेत स्तर पर कम से कम 75 प्रतिशत जल उपयोग दक्षता प्राप्त करना है। यह योजना जल संरक्षण और कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बगिया प्रेसराइज्ड लिफ्ट सिंचाई परियोजना
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बगिया गांव में 2 मई 2026 को मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने 119 करोड़ रुपये की प्रेसराइज्ड लिफ्ट सिंचाई परियोजना का उद्घाटन किया। यह परियोजना 13 गांवों में लगभग 4,933 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विकसित की जा रही है। परियोजना में भूमिगत पाइपलाइन, सौर ऊर्जा, एससीएडीए प्रणाली और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इस परियोजना को केंद्र सरकार से 95.89 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है और इसके उद्घाटन के छह महीने के भीतर पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है।
आधुनिक तकनीकों का उपयोग
परियोजना में प्रयुक्त एससीएडीए (Supervisory Control and Data Acquisition) प्रणाली स्वचालित अवसंरचना निगरानी के लिए उपयोग की जाती है। इसके माध्यम से जल प्रवाह, उपकरणों की स्थिति और संचालन संबंधी आंकड़ों की वास्तविक समय में निगरानी संभव होती है। वहीं आईओटी तकनीक सिंचाई नेटवर्क को डिजिटल रूप से जोड़ती है, जिससे जल वितरण अधिक सटीक और कुशल बनता है। इन तकनीकों का उपयोग कृषि क्षेत्र में स्मार्ट सिंचाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जलग्रहण और कमांड क्षेत्र विकास
15 मई 2026 को ग्रामीण विकास मंत्रालय ने धमतरी जिले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत संचालित जलग्रहण विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इस समीक्षा में सिंचाई सुविधाओं और ग्रामीण आजीविका पर उनके प्रभाव का मूल्यांकन किया गया। इसके अतिरिक्त 14 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार ने 14 नई सिंचाई परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की थी। इन परियोजनाओं के माध्यम से लगभग एक लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई के दायरे में लाने का लक्ष्य है।
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता महत्व
केंद्र सरकार अप्रैल 2026 से राष्ट्रीय कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। यह योजना एम-सीएडीडब्ल्यूएम के अंतर्गत संचालित पायलट परियोजनाओं के अनुभवों पर आधारित होगी। छत्तीसगढ़ का मॉडल इस राष्ट्रीय योजना के लिए एक सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। इससे देशभर में जल प्रबंधन और कृषि उत्पादकता में सुधार लाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पीएमकेएसवाई का पूरा नाम प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना है।
- एम-सीएडीडब्ल्यूएम योजना का उद्देश्य खेत स्तर पर कम से कम 75 प्रतिशत जल उपयोग दक्षता प्राप्त करना है।
- एससीएडीए का उपयोग स्वचालित अवसंरचना और जल प्रबंधन प्रणालियों की निगरानी के लिए किया जाता है।
- आईओटी तकनीक स्मार्ट और परस्पर जुड़ी सिंचाई प्रणालियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
छत्तीसगढ़ की आधुनिक सिंचाई पहल ने यह साबित किया है कि तकनीक और प्रभावी जल प्रबंधन के संयोजन से कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार संभव है। राज्य का यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है और जल संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयासों को नई दिशा दे सकता है।