केएयू तेजस्विनी: केरल कृषि विश्वविद्यालय की नई हरी मिर्च किस्म
कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देते हुए केरल कृषि विश्वविद्यालय ने 7 जून 2026 को हरी मिर्च की एक नई किस्म “केएयू तेजस्विनी” जारी की है। यह किस्म केरल की जलवायु और कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। इसका विकास वेल्लायनी स्थित कृषि महाविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग द्वारा किया गया है। नई किस्म से किसानों को बेहतर उत्पादन, रोग सहनशीलता और गुणवत्तापूर्ण उपज प्राप्त होने की उम्मीद है।
किस्म की प्रमुख विशेषताएं
Kerala Agricultural University द्वारा विकसित केएयू तेजस्विनी एक झाड़ीदार (बुश-टाइप) हरी मिर्च की किस्म है। इसे विशेष रूप से केरल की खेती की परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है। यह किस्म प्रमुख उत्पादन चुनौतियों के प्रति सहनशीलता रखती है और पूरे वर्ष खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसे घरेलू बागानों, रसोई उद्यानों और छत पर की जाने वाली खेती में भी आसानी से उगाया जा सकता है। इससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उत्पादकों को लाभ मिलने की संभावना है।
उत्पादन क्षमता और फल की विशेषताएं
केएयू तेजस्विनी की उत्पादन क्षमता लगभग 32.5 टन प्रति हेक्टेयर है, जो इसे उच्च उत्पादक किस्मों की श्रेणी में रखती है। एक पौधे से औसतन 84 फल प्राप्त होते हैं और प्रति पौधा लगभग 667 ग्राम उपज मिलती है। इसके फल लगभग 11.29 सेंटीमीटर लंबे होते हैं। फल लटकने वाले, चिकने, चमकदार और गहरे हरे रंग के होते हैं। पकने पर इनका रंग लाल हो जाता है, जिससे यह बाजार में आकर्षक दिखाई देते हैं।
गुणवत्ता और रोग सहनशीलता
इस किस्म में तीखापन मध्यम स्तर का है। इसमें कैप्साइसिन की मात्रा लगभग 0.45 प्रतिशत पाई गई है। कैप्साइसिन वही प्राकृतिक यौगिक है जो मिर्च को तीखा स्वाद प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त इसमें प्रति 100 ग्राम 121 मिलीग्राम विटामिन-सी तथा 15.1 प्रतिशत ओलियोरेजिन मौजूद है। ओलियोरेजिन खाद्य प्रसंस्करण और मसाला उद्योग में उपयोग होने वाला महत्वपूर्ण प्राकृतिक अर्क है। केएयू तेजस्विनी की एक प्रमुख विशेषता इसका रोगों के प्रति सहनशील होना है। यह बैक्टीरियल विल्ट तथा कई वायरल रोगों के प्रति सहनशीलता प्रदर्शित करती है, जिससे किसानों को फसल हानि कम होने की संभावना रहती है।
स्वीकृति और जारी करने की प्रक्रिया
इस नई किस्म को 3 जून 2026 को आयोजित 30वीं राज्य बीज उप-समिति द्वारा मंजूरी दी गई थी। इस समिति की अध्यक्षता केरल सरकार के कृषि उत्पादन आयुक्त एवं प्रधान सचिव Tinku Biswal ने की। स्वीकृति मिलने के बाद 7 जून 2026 को इस किस्म को औपचारिक रूप से किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए जारी किया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- केरल कृषि विश्वविद्यालय केरल का प्रमुख राज्य कृषि विश्वविद्यालय है।
- कैप्साइसिन मिर्च के तीखेपन के लिए जिम्मेदार प्राकृतिक रासायनिक यौगिक है।
- बैक्टीरियल विल्ट एक प्रमुख पौध रोग है जो जीवाणु संक्रमण के कारण होता है।
- ओलियोरेजिन मसाला और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में उपयोग होने वाला प्राकृतिक अर्क है।
केएयू तेजस्विनी हरी मिर्च की यह नई किस्म बेहतर उत्पादन, पोषण गुणवत्ता और रोग सहनशीलता का संतुलित उदाहरण है। इसकी विशेषताएं किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू और व्यावसायिक स्तर पर मिर्च उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।