असम की जीआई-टैग प्राप्त तेजपुर लीची का दुबई और सिंगापुर को पहला निर्यात

असम की जीआई-टैग प्राप्त तेजपुर लीची का दुबई और सिंगापुर को पहला निर्यात

असम की प्रसिद्ध जीआई-टैग प्राप्त तेजपुर लीची ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 9 जून 2026 को तेजपुर लीची की पहली निर्यात खेप दुबई और सिंगापुर के लिए रवाना की गई। इस पहल को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) का समर्थन प्राप्त था। निर्यात खेप को सोनितपुर जिले के तेजपुर जिला पुस्तकालय से औपचारिक रूप से रवाना किया गया। यह कदम न केवल असम के बागवानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करता है।

तेजपुर लीची की विशेषता और जीआई टैग का महत्व

तेजपुर लीची को वर्ष 2015 में भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ था। जीआई टैग किसी ऐसे उत्पाद को दिया जाता है जिसकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषताएं किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती हैं। तेजपुर लीची अपने अनूठे स्वाद, गूदेदार बनावट और आकर्षक रंग के लिए प्रसिद्ध है। इसकी विशिष्ट गुणवत्ता ने इसे देश और विदेश के बाजारों में अलग पहचान दिलाई है। तेजपुर में लीची की खेती का इतिहास लगभग एक शताब्दी पुराना है। वर्ष 1923 में पद्मनाथ गोहाई बरुआ ने यहां पहली बार लीची के बाग स्थापित किए थे। वर्ष 2026 में आयोजित तेजपुर लीची महोत्सव के दौरान इस ऐतिहासिक यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने का भी उत्सव मनाया गया।

निर्यात से बढ़ेगा किसानों का लाभ

तेजपुर लीची महोत्सव 2026 के दौरान लगभग एक टन लीची दुबई भेजी गई, जबकि करीब 600 किलोग्राम लीची सिंगापुर निर्यात की गई। यह दो दिवसीय महोत्सव स्थानीय किसानों और उत्पादकों के लिए नए अवसर लेकर आया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। निर्यात खेप को सोनितपुर के जिला आयुक्त आनंद कुमार दास ने रवाना किया। इस अवसर पर तेजपुर के विधायक पृथ्वीराज राभा, जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार तालुकदार और सदर कृषि अधिकारी जाकिर हुसैन सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

एपीडा की भूमिका और कृषि निर्यात को बढ़ावा

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है। एपीडा किसानों, निर्यातकों और उत्पादक समूहों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता प्रदान करता है। भारत दुनिया के प्रमुख लीची उत्पादक देशों में शामिल है। बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर लीची की खेती की जाती है। हाल के वर्षों में भारतीय फलों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने से कृषि निर्यात को नई गति मिली है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • तेजपुर लीची को वर्ष 2015 में भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया था।
  • तेजपुर में लीची की खेती की शुरुआत वर्ष 1923 में हुई थी।
  • एपीडा भारत के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था है।
  • जीआई टैग किसी उत्पाद को उसकी विशिष्ट भौगोलिक पहचान और प्रतिष्ठा के आधार पर प्रदान किया जाता है।
  • भारत विश्व के प्रमुख लीची उत्पादक देशों में से एक है।

तेजपुर लीची का दुबई और सिंगापुर को पहला निर्यात असम के कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय किसानों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच मिलेगी, बल्कि भारत के जीआई-टैग प्राप्त कृषि उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहचान भी और मजबूत होगी। आने वाले वर्षों में इस पहल से क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

Originally written on June 9, 2026 and last modified on June 9, 2026.

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