भारत ने हंटावायरस निगरानी के लिए सक्रिय किया 165 लैब का राष्ट्रीय नेटवर्क
भारत सरकार ने हंटावायरस संक्रमण की निगरानी और जांच के लिए देशभर में 165 विशेष प्रयोगशालाओं वाला वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी नेटवर्क सक्रिय कर दिया है। यह नेटवर्क संदिग्ध मामलों की पुष्टि के लिए आरटी-पीसीआर तकनीक का उपयोग करेगा और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के सहयोग से कार्य करेगा।
क्या है हंटावायरस
हंटावायरस आरएनए वायरसों का एक समूह है, जो हंटाविरिडी परिवार से संबंधित हैं। यह जूनोटिक वायरस होते हैं, यानी इनका संक्रमण जानवरों से मनुष्यों में फैल सकता है। विभिन्न प्रजातियों के कृंतक यानी चूहे और अन्य छोटे जीव इन वायरसों के मुख्य वाहक माने जाते हैं। मनुष्यों में संक्रमण संक्रमित कृंतकों के मल-मूत्र, दूषित धूल या कुछ विशेष परिस्थितियों में संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से फैल सकता है।
एंडीज स्ट्रेन पर विशेष निगरानी
हाल के मामलों में जिस हंटावायरस स्ट्रेन का उल्लेख किया गया है, उसे “एंडीज स्ट्रेन” कहा जाता है। यह वही स्ट्रेन है जो एमवी होंडियस क्रूज जहाज से जुड़े मामलों में पाया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार एंडीज स्ट्रेन में सीमित स्तर पर व्यक्ति से व्यक्ति में संक्रमण फैलने की क्षमता देखी गई है, विशेषकर लंबे समय तक निकट संपर्क में रहने पर। एशिया और यूरोप में पाए जाने वाले कई हंटावायरस “हेमरेजिक फीवर विथ रीनल सिंड्रोम” से जुड़े होते हैं, जो मुख्य रूप से किडनी को प्रभावित करता है।
भारत की निगरानी और जांच व्यवस्था
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के साथ मिलकर एहतियाती निगरानी व्यवस्था लागू की है। वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी नेटवर्क देशभर में वायरल संक्रमणों की जांच के लिए प्रयोगशाला सुविधाएं उपलब्ध कराता है। इसी नेटवर्क के माध्यम से संदिग्ध हंटावायरस मामलों की पहचान और पुष्टि की जाएगी। सरकार के अनुसार वर्तमान में भारत में किसी बड़े संक्रमण का संकेत नहीं मिला है, लेकिन निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
एमवी होंडियस घटना और वैश्विक स्थिति
एमवी होंडियस नामक क्रूज जहाज पर कई हंटावायरस संक्रमण के मामले सामने आए थे, जिनमें तीन लोगों की मौत भी हुई थी। 9 मई 2026 तक जहाज पर मौजूद दो भारतीय नागरिकों को बिना लक्षण वाला पाया गया और उन्हें निगरानी में रखा गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मौजूदा हंटावायरस स्थिति को वैश्विक स्तर पर कम सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम वाला बताया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- हंटावायरस हंटाविरिडी परिवार के आरएनए वायरस हैं।
- भारत के पास 165 विशेष आरटी-पीसीआर सक्षम वायरल जांच प्रयोगशालाएं हैं।
- राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र भारत की रोग निगरानी प्रणाली का प्रमुख हिस्सा है।
- एंडीज स्ट्रेन सीमित मानव-से-मानव संक्रमण के लिए जाना जाता है।
भारत की सक्रिय निगरानी और जांच व्यवस्था संभावित वायरल संक्रमणों से निपटने की तैयारी को दर्शाती है। हंटावायरस जैसे संक्रमणों के प्रति सतर्कता और वैज्ञानिक निगरानी भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।