राजस्थान में मातृ दुग्ध बैंक योजना से हजारों नवजातों को मिला जीवनदान
राजस्थान में मातृ दुग्ध दान कार्यक्रम नवजात शिशुओं के लिए जीवनरक्षक पहल के रूप में उभर रहा है। राज्य में बाड़मेर जिला अस्पताल का मदर मिल्क बैंक, जयपुर का “जीवन धारा” मानव दुग्ध बैंक और नॉर्वे-इंडिया पार्टनरशिप इनिशिएटिव के तहत चलाया जा रहा “यशोदा कार्यक्रम” इस अभियान के प्रमुख हिस्से हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य उन नवजात बच्चों को सुरक्षित मातृ दुग्ध उपलब्ध कराना है, जिन्हें अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता।
क्या होते हैं मानव दुग्ध बैंक
मानव दुग्ध बैंक ऐसे विशेष केंद्र होते हैं जहां स्तनपान कराने वाली माताओं से दूध एकत्र किया जाता है। इसके बाद दूध की जांच, प्रसंस्करण, सुरक्षित भंडारण और जरूरतमंद नवजातों तक वितरण किया जाता है। इन बैंकों का उपयोग विशेष रूप से नवजात गहन चिकित्सा इकाइयों यानी एनआईसीयू में किया जाता है। यहां संक्रमण जांच, सुरक्षित भंडारण और स्तनपान सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल होती हैं।
बाड़मेर मदर मिल्क बैंक की उपलब्धियां
बाड़मेर जिला अस्पताल स्थित मदर मिल्क बैंक ने 4 मार्च 2018 से अब तक 29,882 यूनिट दूध संग्रहित किया है। इस दूध से 3,165 नवजात शिशुओं को सहायता मिली है। 11 मई 2026 तक यहां 3,523 महिलाओं को “यशोदा मदर” के रूप में पंजीकृत किया गया। बैंक में दूध को माइनस 19 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है और इसे छह महीने तक संरक्षित किया जा सकता है। प्रत्येक दूध नमूने की एचआईवी और अन्य संक्रमणों के लिए जांच की जाती है। 11 मई 2026 तक बैंक में 220 यूनिट यानी लगभग 6,600 मिलीलीटर दूध सुरक्षित रखा गया था।
जयपुर और भीलवाड़ा की पहल
जयपुर के महिला चिकित्सालय में “जीवन धारा” मानव दुग्ध बैंक की शुरुआत 27 मार्च 2015 को की गई थी। इसे नॉर्वे सरकार और जेके लोन अस्पताल के सहयोग से स्थापित किया गया था। यह राजस्थान का पहला सरकारी मानव दुग्ध बैंक माना जाता है। वहीं भीलवाड़ा के आंचल मदर मिल्क बैंक में रक्षा जैन नामक महिला ने जून 2018 से नवंबर 2023 के बीच 160.81 लीटर दूध दान किया। इस दूध से 5,000 से अधिक बार बच्चों को पोषण उपलब्ध कराया गया।
मातृ और नवजात स्वास्थ्य में भूमिका
यशोदा कार्यक्रम वर्ष 2008 से नॉर्वे-इंडिया पार्टनरशिप इनिशिएटिव के तहत संचालित हो रहा है। इसका उद्देश्य जन्म के तुरंत बाद स्तनपान और केवल मां का दूध देने की प्रक्रिया को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों के अनुसार मातृ दुग्ध नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, संक्रमण से बचाने और स्वस्थ विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बाड़मेर जिला अस्पताल का मदर मिल्क बैंक 4 मार्च 2018 को शुरू हुआ था।
- दूध को माइनस 19 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है।
- “जीवन धारा” राजस्थान का पहला सरकारी मानव दुग्ध बैंक है।
- यशोदा कार्यक्रम वर्ष 2008 से नॉर्वे-इंडिया पार्टनरशिप इनिशिएटिव के तहत संचालित हो रहा है।
राजस्थान की मातृ दुग्ध बैंक पहल नवजात स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मॉडल बनकर उभरी है। इससे हजारों बच्चों को पोषण और जीवनरक्षक सहायता मिल रही है, वहीं मातृत्व और स्तनपान के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।