एमबीबीएस कोर्स पूरा करने की समयसीमा 10 वर्ष करने का प्रस्ताव
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने 18 मई 2026 को एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने की अधिकतम समयसीमा को 9 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन (संशोधन) विनियम, 2026 के मसौदे के तहत लाया गया है। इसके माध्यम से ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन विनियम, 2023 के क्लॉज 21 में संशोधन करने का सुझाव दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य मेडिकल छात्रों को पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध कराना है।
एमबीबीएस पाठ्यक्रम की वर्तमान व्यवस्था
भारत में एमबीबीएस पाठ्यक्रम का संचालन और नियमन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा निर्धारित ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन विनियमों के अंतर्गत किया जाता है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार एमबीबीएस की अधिकतम अवधि 10 वर्ष होगी, जिसमें अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप भी शामिल रहेगी। यह इंटर्नशिप चिकित्सा शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और बिना इसके एमबीबीएस डिग्री पूर्ण नहीं मानी जाती।
परीक्षा और प्रयास संबंधी नियम
मसौदा विनियमों में प्रथम प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा के लिए वर्तमान नियमों को बरकरार रखा गया है। छात्रों को इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए अधिकतम चार अवसर ही मिलेंगे। प्रथम प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा को सामान्यतः प्रथम वर्ष की एमबीबीएस परीक्षा के रूप में जाना जाता है और यह मेडिकल शिक्षा की प्रारंभिक विश्वविद्यालय स्तरीय परीक्षा होती है।
सार्वजनिक परामर्श की प्रक्रिया
एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लांगर ने इस मसौदा संशोधन को सार्वजनिक सुझावों और टिप्पणियों के लिए जारी किया है। सभी संबंधित हितधारकों, शिक्षण संस्थानों, छात्रों और विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इस परामर्श प्रक्रिया की अवधि 30 दिन निर्धारित की गई है और सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 27 जून 2026 रखी गई है।
ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन विनियम, 2023 का महत्व
ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन विनियम, 2023 भारत में एमबीबीएस छात्रों के प्रवेश, प्रशिक्षण, परीक्षा और इंटर्नशिप से जुड़े नियमों को नियंत्रित करते हैं। इन विनियमों का क्लॉज 21 विशेष रूप से पाठ्यक्रम पूरा करने की समयसीमा से संबंधित है। प्रस्तावित संशोधन इसी प्रावधान में बदलाव करने के उद्देश्य से लाया गया है।
संभावित प्रभाव और महत्व
यदि यह संशोधन लागू होता है, तो छात्रों को पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए अतिरिक्त एक वर्ष का समय मिलेगा। इससे उन छात्रों को राहत मिल सकती है जो विभिन्न शैक्षणिक, स्वास्थ्य या व्यक्तिगत कारणों से निर्धारित समयसीमा के भीतर पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर पाते हैं। हालांकि, प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा में चार प्रयासों की सीमा यथावत रहने से शैक्षणिक गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखने का प्रयास भी जारी रहेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की स्थापना राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के तहत की गई थी। ” एमबीबीएस का पूर्ण रूप बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी है। ” अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप भारतीय मेडिकल शिक्षा का आवश्यक हिस्सा है। ” प्रथम प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा को आमतौर पर प्रथम वर्ष की मेडिकल परीक्षा कहा जाता है। * ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन विनियम, 2023 एमबीबीएस शिक्षा के प्रमुख नियामक नियम हैं। एमबीबीएस पाठ्यक्रम की समयसीमा बढ़ाने का यह प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे छात्रों को अधिक लचीलापन मिलने की संभावना है, जबकि परीक्षा संबंधी मौजूदा मानकों को बनाए रखते हुए शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रयास भी जारी रहेगा।