केरल में स्कूली छात्राओं के लिए मासिक धर्म अवकाश का प्रस्ताव

केरल में स्कूली छात्राओं के लिए मासिक धर्म अवकाश का प्रस्ताव

केरल सरकार ने स्कूली छात्राओं के लिए हर महीने तीन दिन के मासिक धर्म अवकाश का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। यह घोषणा 29 मई 2026 को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा केरल विधानसभा में दिए गए नीति संबोधन का हिस्सा थी। इस पहल का उद्देश्य छात्राओं के स्वास्थ्य, सम्मान और शैक्षिक भागीदारी को बेहतर बनाना है तथा मासिक धर्म से जुड़ी चुनौतियों को संवेदनशीलता के साथ संबोधित करना है।

मासिक धर्म अवकाश की अवधारणा

मासिक धर्म अवकाश एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत महिलाओं या लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान आराम और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अवकाश लेने की अनुमति दी जाती है। यह प्रावधान कई देशों और संस्थानों में अलग-अलग रूपों में लागू है। भारत में अभी तक मासिक धर्म अवकाश को लेकर कोई एक समान राष्ट्रीय कानून नहीं है। हालांकि कुछ राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों और निजी संस्थानों ने अपने स्तर पर ऐसी सुविधाएं प्रदान की हैं।

प्रोजेक्ट मेन्स्ट्रुअल डिग्निटी से जुड़ी पहल

केरल का यह प्रस्ताव “प्रोजेक्ट मेन्स्ट्रुअल डिग्निटी” के अंतर्गत रखा गया है। यह महिलाओं और बच्चों के अनुकूल वातावरण विकसित करने की एक व्यापक पहल है। परियोजना का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर मासिक धर्म स्वच्छता और गरिमा से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ावा देना है। सरकार ने यह भी प्रस्तावित किया है कि जो छात्राएं मासिक धर्म अवकाश का उपयोग करेंगी, उनके लिए सप्ताहांत में विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएंगी ताकि पढ़ाई में किसी प्रकार की कमी न आए।

छात्राओं के स्वास्थ्य और शिक्षा पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि मासिक धर्म के दौरान कई छात्राओं को शारीरिक असुविधा, दर्द और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह अवकाश व्यवस्था उन्हें आवश्यक आराम प्रदान कर सकती है और विद्यालय छोड़ने या अनुपस्थित रहने की समस्या को कम कर सकती है। यह कदम मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने और छात्राओं के प्रति अधिक संवेदनशील शैक्षणिक वातावरण बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कार्यस्थलों के लिए क्रेच सुविधा का प्रस्ताव

नीति संबोधन में केवल छात्राओं के लिए मासिक धर्म अवकाश ही नहीं, बल्कि कार्यस्थलों पर कर्मचारी कल्याण से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल थे। सरकार ने 50 से अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों में सुरक्षित डे-केयर केंद्र और क्रेच सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना की घोषणा की। भारत में मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के अंतर्गत निर्धारित कर्मचारी संख्या वाले संस्थानों में क्रेच सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान पहले से मौजूद है। यह व्यवस्था कामकाजी महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा उपाय मानी जाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में मासिक धर्म अवकाश को लेकर कोई एक समान राष्ट्रीय कानून लागू नहीं है।
  • बिहार ने 1990 के दशक में महिला कर्मचारियों के लिए मासिक धर्म अवकाश की व्यवस्था शुरू की थी।
  • मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 मातृत्व संबंधी सुविधाओं और लाभों से जुड़ा केंद्रीय कानून है।
  • प्रोजेक्ट मेन्स्ट्रुअल डिग्निटी महिलाओं और बच्चों के अनुकूल सुविधाओं को बढ़ावा देने वाली पहल है।

केरल का यह प्रस्ताव महिला स्वास्थ्य, शिक्षा और गरिमा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह योजना लागू होती है, तो यह छात्राओं के लिए अधिक समावेशी और संवेदनशील शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में मदद कर सकती है तथा अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

Originally written on May 30, 2026 and last modified on May 30, 2026.

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