उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रबंधन के लिए एआई और डिजिटलीकरण का विस्तार
उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2026 में परीक्षा प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा डिजिटलीकृत प्रणालियों को व्यापक रूप से अपनाया है। राज्य में बारकोड आधारित उपस्थिति, बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल मूल्यांकन, रियल-टाइम निगरानी और एआई-सक्षम सीसीटीवी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाना और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है।
एकेटीयू का एआई आधारित परीक्षा प्रबंधन मॉडल
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) ने 30 मई 2026 को एआई आधारित सीटिंग प्लान और उपस्थिति प्रणाली की घोषणा की। इसका पायलट प्रोजेक्ट लखनऊ स्थित सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज में एमटेक परीक्षाओं के लिए लागू किया गया है। यह मॉडल उत्तर प्रदेश के 756 संबद्ध महाविद्यालयों तक विस्तारित होने की क्षमता रखता है। इस प्रणाली के अंतर्गत बारकोड युक्त प्रवेश पत्र, निरीक्षकों द्वारा बारकोड स्कैनिंग, विद्यार्थियों के फोटो सत्यापन, उत्तर पुस्तिका के प्रथम पृष्ठ की स्कैनिंग तथा टैबलेट पर डिजिटल हस्ताक्षर जैसी सुविधाएं शामिल हैं। पूरी प्रक्रिया की निगरानी एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से रियल-टाइम में की जाती है।
भर्ती परीक्षाओं में एआई आधारित निगरानी
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (यूपीईएसएससी) ने 9 और 10 मई 2026 को आयोजित प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा में एआई आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग किया। इस परीक्षा में 1,92,934 अभ्यर्थियों ने भाग लिया और कुल उपस्थिति 41.53 प्रतिशत दर्ज की गई। लखनऊ में स्थापित एआई-संयुक्त कंट्रोल कमांड रूम के माध्यम से राज्यभर के परीक्षा केंद्रों की निगरानी की गई। आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने अप्रैल 2026 में परीक्षा में गड़बड़ियों के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति की घोषणा की थी। इसी उद्देश्य से आयोग मुख्यालय में एकीकृत नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया।
विश्वविद्यालयों और बोर्ड परीक्षाओं में डिजिटलीकरण
1 मई 2026 से उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में, कृषि और चिकित्सा संस्थानों को छोड़कर, डिजिटलीकृत परीक्षा प्रणाली लागू की जा रही है। राज्यपाल सचिवालय ने इस उद्देश्य के लिए एकेटीयू मॉडल को मंजूरी प्रदान की है। इसमें छात्रों और कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की गई है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए 8,000 से अधिक परीक्षा केंद्रों के स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना को स्वीकृति दी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 20 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अतिरिक्त बोर्ड ने पूर्ण डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की भी योजना बनाई है, जिसके तहत परीक्षक सुरक्षित डिजिटल पोर्टल के माध्यम से अंक अपलोड करेंगे।
परीक्षा सुरक्षा में तकनीक की बढ़ती भूमिका
भारत में परीक्षा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली परिणाम प्रसंस्करण को तेज और अधिक सटीक बनाती है, जबकि एआई आधारित निगरानी परीक्षा केंद्रों और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा को मजबूत करती है। इससे नकल, फर्जीवाड़े और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग परीक्षा प्रबंधन में उपस्थिति, निगरानी और डेटा सत्यापन के लिए किया जाता है। ” बायोमेट्रिक उपस्थिति में फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान जैसी तकनीकों का उपयोग होता है। ” बारकोड आधारित प्रवेश पत्र मशीन द्वारा पढ़े जा सकने वाले पहचान साधन होते हैं। ” कंट्रोल कमांड रूम बड़े स्तर की परीक्षाओं की केंद्रीय निगरानी के लिए स्थापित किए जाते हैं। * डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अंक प्रविष्टि और परिणाम प्रसंस्करण को सक्षम बनाती है। उत्तर प्रदेश द्वारा परीक्षा प्रबंधन में एआई और डिजिटलीकरण को अपनाना शिक्षा प्रशासन में तकनीकी नवाचार का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इन उपायों से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे छात्रों और संस्थानों दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।