नागालैंड में खोजी गई मेंढक की नई प्रजाति ‘अमोलॉप्स कमल’

नागालैंड में खोजी गई मेंढक की नई प्रजाति ‘अमोलॉप्स कमल’

भारत की जैव विविधता को समृद्ध करने वाली एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज में नागालैंड से मेंढक की एक नई प्रजाति ‘अमोलॉप्स कमल’ (Amolops kamal) की पहचान की गई है। इस प्रजाति का औपचारिक विवरण 29 मई 2026 को प्रकाशित किया गया। यह खोज भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई), शिलांग के वैज्ञानिकों द्वारा अगस्त 2024 में नागालैंड के किफिरे जिले के सिंगरेप गांव के निकट किए गए एक फील्ड सर्वेक्षण के दौरान हुई थी। यह खोज पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध जैव विविधता और वहां पाए जाने वाले विशिष्ट उभयचर जीवों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित करती है।

क्या हैं कैस्केड मेंढक

अमोलॉप्स कमल कैस्केड मेंढकों के समूह से संबंधित है। कैस्केड मेंढक ‘अमोलॉप्स’ (Amolops) वंश के सदस्य होते हैं, जो तेज बहाव वाली पहाड़ी धाराओं, झरनों और चट्टानी जलधाराओं के आसपास पाए जाते हैं। ये मेंढक विशेष रूप से ऐसे वातावरण में जीवित रहने के लिए अनुकूलित होते हैं, जहां जल प्रवाह अत्यधिक तेज होता है। अमोलॉप्स वंश को रैनिडी (Ranidae) परिवार में रखा जाता है, जिसे सामान्यतः ‘सच्चे मेंढकों’ का प्रमुख परिवार माना जाता है। इस वंश की कई प्रजातियां एशिया के पर्वतीय और वन क्षेत्रों में पाई जाती हैं।

नई प्रजाति की पहचान कैसे हुई

वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति की पहचान के लिए ‘इंटीग्रेटिव टैक्सोनॉमी’ पद्धति का उपयोग किया। इस वैज्ञानिक विधि में किसी जीव की शारीरिक संरचना, आनुवंशिक विशेषताओं और अन्य जैविक आंकड़ों का संयुक्त अध्ययन किया जाता है। मॉलिक्यूलर फाइलोजेनेटिक विश्लेषण से यह पुष्टि हुई कि अमोलॉप्स कमल, अमोलॉप्स इंडोबर्मानेन्सिस प्रजाति समूह के भीतर एक अलग और स्वतंत्र विकासवादी वंश का प्रतिनिधित्व करता है। इस प्रकार यह वैज्ञानिक रूप से एक नई प्रजाति के रूप में स्थापित हुई।

नामकरण और शोध प्रकाशन

इस नई प्रजाति का नाम ‘कमल’ दिवंगत डॉ. कमल चौधरी के सम्मान में रखा गया है। वे शोध के प्रमुख लेखक भास्कर सैकिया के शिक्षक और मार्गदर्शक रहे थे। वैज्ञानिक जगत में किसी नई प्रजाति का नाम किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के सम्मान में रखना एक सामान्य परंपरा है। इस शोध को भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की वैज्ञानिक पत्रिका ‘रिकॉर्ड्स ऑफ द जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित किया गया। शोध दल में भास्कर सैकिया, बिक्रमजीत सिन्हा, ए. शबनम, प्रबीर नारायण कोंवर, मृदुल कुमार बोरठाकुर और के.पी. दिनेश शामिल थे।

पूर्वोत्तर भारत की जैव विविधता का महत्व

पूर्वोत्तर भारत को विश्व के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में दुर्लभ और स्थानिक (एंडेमिक) उभयचर प्रजातियां पाई जाती हैं। नागालैंड का किफिरे जिला घने वनों, पर्वतीय भूभाग और स्वच्छ जलधाराओं से समृद्ध है, जो उभयचर जीवों के लिए आदर्श आवास प्रदान करता है। अमोलॉप्स कमल की खोज भारत की उभयचर प्रजातियों की सूची में एक नया और महत्वपूर्ण नाम जोड़ती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

” भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) की स्थापना वर्ष 1916 में हुई थी। ” जेडएसआई पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। ” अमोलॉप्स वंश के मेंढक सामान्यतः तेज बहाव वाली पहाड़ी जलधाराओं और झरनों के आसपास पाए जाते हैं। ” प्रजाति समूह (Species Complex) ऐसे निकट संबंधी जीवों का समूह होता है जिनकी सही पहचान के लिए आनुवंशिक और शारीरिक अध्ययन आवश्यक होता है। * नागालैंड पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों में से एक है और अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। अमोलॉप्स कमल की खोज भारतीय उभयचर विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल देश की जैव विविधता संबंधी जानकारी को समृद्ध करती है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण की आवश्यकता को भी उजागर करती है। ऐसी खोजें वैज्ञानिक अनुसंधान और जैव विविधता संरक्षण के महत्व को और अधिक मजबूत बनाती हैं।

Originally written on May 31, 2026 and last modified on May 31, 2026.

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