जल संसाधन प्रबंधन के लिए जल शक्ति मंत्रालय और इसरो के बीच समझौता

जल संसाधन प्रबंधन के लिए जल शक्ति मंत्रालय और इसरो के बीच समझौता

भारत में जल संसाधनों के वैज्ञानिक और तकनीकी प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 1 जून 2026 को नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य उपग्रह प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों का उपयोग करके जल संसाधनों की निगरानी, संरक्षण और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। यह पहल देश की जल सुरक्षा और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को समर्थन प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल मानी जा रही है।

समझौता ज्ञापन और संस्थागत सहयोग

यह एमओयू नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान हस्ताक्षरित किया गया। समझौते के तहत जल संसाधन विभाग और इसरो 24 विभिन्न अनुसंधान क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। इस सहयोग का उद्देश्य अंतरिक्ष विज्ञान और जल प्रबंधन विशेषज्ञता को एक साथ लाकर जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और संरक्षण के लिए आधुनिक समाधान विकसित करना है। इससे नीति निर्माण और संसाधन प्रबंधन में सटीक आंकड़ों का उपयोग बढ़ेगा।

जल प्रबंधन से जुड़े प्रमुख अनुसंधान क्षेत्र

समझौते के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण विषयों पर अनुसंधान किया जाएगा। इनमें जलाशयों की निगरानी, जल क्षेत्रफल का आकलन, नदी प्रवाह विश्लेषण, उपग्रह आधारित जल गुणवत्ता मूल्यांकन तथा जल निकायों में मैक्रोप्लास्टिक के वितरण का अध्ययन शामिल है। ये सभी विषय रिमोट सेंसिंग, जल विज्ञान और पर्यावरणीय निगरानी से संबंधित हैं। उपग्रह आधारित आंकड़ों के उपयोग से जल संसाधनों की वास्तविक समय में निगरानी संभव होगी, जिससे बाढ़, सूखा और प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलेगी।

एमएएचए ऑन वॉटर कार्यक्रम और नवाचार पहल

कार्यशाला के दौरान “एमएएचए ऑन वॉटर” कार्यक्रम भी शुरू किया गया। इसका पूर्ण रूप “मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज फॉर वॉटर” है। यह कार्यक्रम जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की संयुक्त पहल है। इसके साथ ही भारत वॉटर इनोवेशन नेटवर्क मंच के तहत स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए एक खुली आवेदन प्रक्रिया की भी घोषणा की गई। इस मंच का उद्देश्य जल क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना तथा नई तकनीकों और समाधान विकसित करने वाले उद्यमों को प्रोत्साहित करना है।

जल सुरक्षा और विकसित भारत का लक्ष्य

भारत में जल सुरक्षा को दीर्घकालिक विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसरो और जल संसाधन क्षेत्र के बीच सहयोग कोई नया प्रयास नहीं है। दोनों संस्थानों के बीच तकनीकी सहयोग का इतिहास वर्ष 1982 से जुड़ा हुआ है। पिछले चार दशकों में उपग्रह प्रौद्योगिकी ने जल निकायों की मैपिंग, बाढ़ निगरानी और सूखा मूल्यांकन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी और यह भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अधीन कार्य करता है।
  • रिमोट सेंसिंग उपग्रहों का उपयोग भारत में जल निकायों की मैपिंग, बाढ़ निगरानी और सूखा आकलन के लिए किया जाता है।
  • डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र नई दिल्ली में स्थित एक प्रमुख सम्मेलन और शोध गतिविधि केंद्र है।
  • भारत में जल संसाधन प्रबंधन में नदी बेसिन, जलाशय, भूजल और जल गुणवत्ता की निगरानी शामिल होती है।

जल शक्ति मंत्रालय और इसरो के बीच यह सहयोग भारत में जल प्रबंधन को तकनीकी रूप से अधिक उन्नत और डेटा-आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उपग्रह प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के समन्वय से देश की जल सुरक्षा को मजबूत करने तथा भविष्य की जल चुनौतियों का प्रभावी समाधान विकसित करने में सहायता मिलेगी। यह पहल सतत विकास और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

Originally written on June 2, 2026 and last modified on June 2, 2026.

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