वैज्ञानिकों ने चूहों की आंखों की कोशिकाओं में प्रदर्शित की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया
विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि के तहत शोधकर्ताओं ने पहली बार चूहों की आंखों की कोशिकाओं में प्रकाश संश्लेषण जैसी प्रक्रिया सफलतापूर्वक प्रदर्शित की है। यह अध्ययन मई 2026 में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका सेल में प्रकाशित हुआ। शोध में पौधों से प्राप्त क्लोरोप्लास्ट संरचनाओं और एक कृत्रिम नैनो-प्रणाली लीफ (LEAF – Light-driven Engineered Artificial thylakoid Factory) का उपयोग किया गया। इस प्रयोग में स्तनधारी जीवों की कॉर्नियल कोशिकाओं को सामान्य प्रकाश के संपर्क में रखकर जैविक रूप से उपयोगी ऊर्जा अणुओं का उत्पादन कराया गया।
क्या है लीफ (LEAF) तकनीक?
लीफ एक पौध-आधारित नैनो-प्रणाली है जिसे स्तनधारी कोशिकाओं के भीतर अस्थायी “नव-अंगक” (Neo-organelle) के रूप में कार्य करने के लिए विकसित किया गया है। इसमें पालक से प्राप्त जैविक घटकों का उपयोग किया गया है। प्रकाश की उपस्थिति में यह प्रणाली एटीपी (ATP) और एनएडीपीएच (NADPH) जैसे महत्वपूर्ण अणुओं का निर्माण करती है। ये दोनों अणु कोशिकाओं में ऊर्जा हस्तांतरण, जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं और ऑक्सीकरण-अपचयन संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्तनधारी कोशिकाओं में प्रकाश संश्लेषण कैसे संभव हुआ?
प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से पौधे, शैवाल और कुछ बैक्टीरिया सूर्य के प्रकाश को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। सामान्यतः यह प्रक्रिया केवल क्लोरोप्लास्ट युक्त जीवों में ही होती है। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पौधों से प्राप्त क्लोरोप्लास्ट-संबंधित संरचनाओं को चूहों की आंखों की कोशिकाओं में प्रविष्ट कराया। जब इन कोशिकाओं को प्रकाश के संपर्क में रखा गया, तब उन्होंने ऊर्जा और जैविक कार्यों के लिए उपयोगी अणुओं का उत्पादन किया। यह पहली बार है जब पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रणाली का उपयोग स्तनधारी ऊतकों के भीतर प्रभावी रूप से किया गया।
आंखों की बीमारियों के उपचार में संभावनाएं
शोध का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सूजन संबंधी नेत्र रोगों के उपचार के लिए नई तकनीक विकसित करना था। विशेष रूप से ड्राई आई डिजीज (केराटोकंजंक्टिवाइटिस सिका) पर इसका परीक्षण किया गया। चूहों पर किए गए प्रारंभिक परीक्षणों में लीफ थेरेपी ने उल्लेखनीय परिणाम दिखाए। इससे कॉर्निया को हुआ नुकसान ठीक हुआ, आंसू परत की स्थिरता लगभग दोगुनी हुई और कई प्रचलित चिकित्सीय दवाओं की तुलना में बेहतर परिणाम प्राप्त हुए। यह संकेत देता है कि भविष्य में प्रकाश-आधारित जैविक उपचार आंखों की बीमारियों के लिए एक नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।
वैज्ञानिक महत्व और भविष्य की संभावनाएं
यह शोध जीव विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संभावना खुलती है कि भविष्य में मानव कोशिकाओं को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करने के लिए पौधों की जैविक प्रणालियों का उपयोग किया जा सके। इससे पहले वर्ष 2024 में जापान में किए गए एक अध्ययन में शैवाल से प्राप्त क्लोरोप्लास्ट को हैम्स्टर कोशिकाओं में प्रत्यारोपित कर दो दिनों तक प्रकाश संश्लेषण गतिविधि बनाए रखने में सफलता मिली थी। हालांकि वर्तमान अध्ययन को स्तनधारी ऊतकों में पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रणाली के प्रत्यारोपण का पहला सफल उदाहरण माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- क्लोरोप्लास्ट पौधों की कोशिकाओं में पाया जाने वाला अंगक है, जहां प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया होती है।
- एटीपी (Adenosine Triphosphate) कोशिकाओं का प्रमुख ऊर्जा अणु माना जाता है।
- एनएडीपीएच (NADPH) जैव संश्लेषण और एंटीऑक्सीडेंट प्रक्रियाओं में उपयोग होने वाला महत्वपूर्ण अपचायक अणु है।
- रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ (ROS) अत्यधिक मात्रा में उपस्थित होने पर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
चूहों की आंखों की कोशिकाओं में प्रकाश संश्लेषण प्रदर्शित करने की यह उपलब्धि आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है। यदि भविष्य में यह तकनीक मानव चिकित्सा में सुरक्षित और प्रभावी सिद्ध होती है, तो ऊर्जा उत्पादन, ऊतक पुनर्जनन और नेत्र रोगों के उपचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। यह शोध विज्ञान और चिकित्सा के संगम पर विकसित हो रही नवाचारपूर्ण तकनीकों का उत्कृष्ट उदाहरण है।