भारत में छोटे परमाणु रिएक्टरों के विकास को मिलेगा नया प्रोत्साहन
भारत में उन्नत परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 3 जून 2026 को फेयरवुड न्यूक्लियर प्राइवेट लिमिटेड और दक्षिण कोरिया की एसके सिक्योरिटीज कंपनी लिमिटेड के बीच एक रणनीतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) और माइक्रो मॉड्यूलर रिएक्टर (एमएमआर) परियोजनाओं के विकास, वित्तपोषण, निवेशकों से संपर्क, उद्योग सहयोग तथा धन जुटाने जैसे क्षेत्रों को कवर करता है। इस पहल को भारत में स्वच्छ और कम-कार्बन ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर क्या हैं?
स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर या एसएमआर पारंपरिक बड़े परमाणु रिएक्टरों की तुलना में कम क्षमता वाले परमाणु ऊर्जा संयंत्र होते हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके प्रमुख हिस्सों का निर्माण कारखानों में मॉड्यूल के रूप में किया जा सकता है और बाद में उन्हें परियोजना स्थल पर स्थापित किया जाता है। इस कारण इनकी निर्माण अवधि अपेक्षाकृत कम होती है और लागत नियंत्रण में भी सहायता मिलती है। एसएमआर को भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक लचीले और प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
माइक्रो मॉड्यूलर रिएक्टरों की विशेषताएं
माइक्रो मॉड्यूलर रिएक्टर, एसएमआर से भी छोटे आकार के उन्नत परमाणु रिएक्टर होते हैं। इन्हें सीमित स्थानों, दूरदराज के क्षेत्रों और विशेष ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए विकसित किया जाता है। एमएमआर का उपयोग वितरित विद्युत उत्पादन, औद्योगिक ऊर्जा आपूर्ति और अन्य विशेष अनुप्रयोगों में संभावित रूप से किया जा सकता है। उनकी कॉम्पैक्ट संरचना और आसान तैनाती इन्हें आधुनिक ऊर्जा प्रणालियों के लिए आकर्षक बनाती है।
समझौते के प्रमुख बिंदु
दोनों कंपनियों के बीच हुआ यह प्रारंभिक समझौता तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है। दक्षिण कोरिया की एसके सिक्योरिटीज अपने परमाणु, अवसंरचना और वित्तीय क्षेत्रों में मौजूद नेटवर्क का उपयोग भारत में भविष्य की परियोजनाओं के लिए निवेश और सहयोग जुटाने में करेगी। इस साझेदारी का उद्देश्य तकनीकी विकास के साथ-साथ वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है।
भारत की परमाणु ऊर्जा रणनीति में महत्व
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम लंबे समय से ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। देश में प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और लाइट वाटर रिएक्टर जैसे विभिन्न प्रकार के परमाणु रिएक्टर विकसित किए गए हैं। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र का संचालन परमाणु ऊर्जा विभाग से संबंधित संस्थानों द्वारा किया जाता है। इसके साथ ही भारत स्वदेशी तकनीक, ईंधन चक्र अनुसंधान और उन्नत रिएक्टर डिजाइन के विकास पर भी लगातार कार्य कर रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्रों की तुलना में कम क्षमता वाले होते हैं।
- माइक्रो मॉड्यूलर रिएक्टर उन्नत परमाणु रिएक्टरों की श्रेणी में आते हैं और एसएमआर से भी छोटे होते हैं।
- भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और लाइट वाटर रिएक्टरों पर आधारित है।
- उन्नत परमाणु रिएक्टर परियोजनाओं को कम-कार्बन विद्युत उत्पादन और ग्रिड लचीलेपन से जोड़ा जाता है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी भविष्य में भारत की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत में एसएमआर और एमएमआर परियोजनाओं के लिए यह नया सहयोग देश की ऊर्जा संरचना को आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी नवाचार और निजी निवेश के संयोजन से यह पहल भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है।