केस्टार ने फ्यूजन अनुसंधान में बनाया नया रिकॉर्ड
दक्षिण कोरिया के केस्टार (कोरिया सुपरकंडक्टिंग टोकामाक एडवांस्ड रिसर्च) ने परमाणु संलयन अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। दिसंबर 2023 से फरवरी 2024 के बीच किए गए प्रयोगों में केस्टार ने उच्च-परिरोध मोड (एच-मोड) में प्लाज्मा को लगातार 102 सेकंड तक बनाए रखा। इसी प्रयोग अभियान के दौरान 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस तापमान वाले प्लाज्मा को 48 सेकंड तक बनाए रखने का भी नया रिकॉर्ड स्थापित किया गया। यह उपलब्धि भविष्य में स्वच्छ और लगभग असीमित ऊर्जा स्रोत माने जाने वाले परमाणु संलयन ऊर्जा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
केस्टार और टोकामाक क्या हैं?
KSTAR दक्षिण कोरिया के डेयजॉन शहर में स्थित एक सुपरकंडक्टिंग टोकामाक अनुसंधान उपकरण है, जिसका संचालन Korea Institute of Fusion Energy द्वारा किया जाता है। टोकामाक एक विशेष प्रकार का चुंबकीय परिरोध उपकरण होता है, जिसका उपयोग परमाणु संलयन अनुसंधान में किया जाता है। इसमें अत्यधिक गर्म प्लाज्मा को एक वलयाकार (टोरॉयडल) कक्ष के भीतर शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों की सहायता से नियंत्रित और सीमित रखा जाता है। इसका उद्देश्य सूर्य में होने वाली ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया को पृथ्वी पर दोहराना है।
एच-मोड और उच्च तापमान प्लाज्मा का महत्व
उच्च-परिरोध मोड या एच-मोड एक विशेष प्लाज्मा संचालन अवस्था है, जिसे पहली बार वर्ष 1982 में टोकामाक प्रयोगों के दौरान पहचाना गया था। इस अवस्था में प्लाज्मा के भीतर ऊष्मा और कणों का संरक्षण बेहतर होता है, जिससे संलयन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। संलयन अनुसंधान में ड्यूटेरियम-ट्रिटियम ईंधन के उपयोग के लिए लगभग 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस तापमान एक महत्वपूर्ण लक्ष्य माना जाता है। केस्टार ने 2021 में 30 सेकंड तक इस तापमान को बनाए रखने का रिकॉर्ड बनाया था, जिसे अब बढ़ाकर 48 सेकंड कर दिया गया है।
टंगस्टन डाइवर्टर से मिली नई क्षमता
वर्ष 2023 में केस्टार में महत्वपूर्ण तकनीकी उन्नयन किए गए, जिनमें पुराने कार्बन आधारित डाइवर्टरों को टंगस्टन डाइवर्टरों से बदलना शामिल था। डाइवर्टर टोकामाक का वह भाग होता है जो प्लाज्मा के किनारों से निकलने वाली ऊष्मा, अशुद्धियों और निकास कणों को हटाने का कार्य करता है। टंगस्टन का गलनांक लगभग 3,422 डिग्री सेल्सियस है, जो इसे अत्यधिक तापमान वाले वातावरण के लिए उपयुक्त बनाता है। प्रयोगों में पाया गया कि समान ऊष्मा भार के दौरान नए टंगस्टन डाइवर्टरों का सतही तापमान पुराने कार्बन आधारित घटकों की तुलना में केवल 25 प्रतिशत अधिक बढ़ा, जो उनकी बेहतर तापीय सहनशीलता को दर्शाता है।
भविष्य के लक्ष्य और महत्व
केस्टार का दीर्घकालिक लक्ष्य उच्च प्रदर्शन वाले प्लाज्मा को लगातार 300 सेकंड तक बनाए रखना है। 102 सेकंड तक एच-मोड संचालन और 48 सेकंड तक 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस तापमान वाले प्लाज्मा को बनाए रखने की उपलब्धि इस दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यदि वैज्ञानिक लंबे समय तक स्थिर संलयन प्रतिक्रिया बनाए रखने में सफल होते हैं, तो भविष्य में परमाणु संलयन ऊर्जा स्वच्छ, सुरक्षित और कम कार्बन उत्सर्जन वाला ऊर्जा स्रोत बन सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- केस्टार का पूरा नाम कोरिया सुपरकंडक्टिंग टोकामाक एडवांस्ड रिसर्च है।
- केस्टार का संचालन कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूजन एनर्जी द्वारा किया जाता है।
- एच-मोड की खोज वर्ष 1982 में टोकामाक प्लाज्मा प्रयोगों के दौरान हुई थी।
- टंगस्टन का गलनांक लगभग 3,422 डिग्री सेल्सियस होता है।
- 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस तापमान ड्यूटेरियम-ट्रिटियम आधारित संलयन अनुसंधान का एक प्रमुख लक्ष्य माना जाता है।
केस्टार की यह उपलब्धि वैश्विक परमाणु संलयन अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय तक उच्च तापमान वाले प्लाज्मा को स्थिर बनाए रखने की क्षमता भविष्य में व्यावसायिक संलयन ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है। इससे स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।