भारत ने शुरू किया सेवा उत्पादन सूचकांक (आईएसपी)
भारत सरकार ने सेवा उत्पादन सूचकांक (Index of Services Production–ISP) की शुरुआत की है। यह सेवाक्षेत्र के प्रदर्शन को मापने वाला देश का पहला उच्च-आवृत्ति (हाई-फ्रीक्वेंसी) व्यापक आर्थिक सूचकांक है, जो औपचारिक सेवाक्षेत्र के वास्तविक उत्पादन को आधार वर्ष की तुलना में दर्शाता है। चूंकि सेवाक्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा है, इसलिए यह सूचकांक आर्थिक गतिविधियों की बेहतर निगरानी, राष्ट्रीय आय के अधिक सटीक आकलन तथा साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अप्रैल 2026 के लिए इसका पहला उप-क्षेत्रीय परीक्षण सूचकांक जारी किया गया है।
सेवा उत्पादन सूचकांक की प्रमुख विशेषताएं
आईएसपी का आधार वर्ष 2024-25 निर्धारित किया गया है, जिससे इसे अन्य प्रमुख आर्थिक सूचकांकों, जैसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), के साथ समन्वित किया जा सके। परीक्षण अवधि में यह सूचकांक प्रत्येक माह लगभग 60 दिनों की देरी के साथ जारी किया जाएगा। हर महीने की 29 तारीख को, अथवा अवकाश होने पर अगले कार्य दिवस में इसका प्रकाशन होगा। इस सूचकांक की कार्यप्रणाली तैयार करने के लिए मई 2025 में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने एक तकनीकी सलाहकार समिति (TAC) का गठन किया था। इसमें शिक्षाविदों, उद्योग संगठनों और विभिन्न आर्थिक मंत्रालयों के विशेषज्ञ शामिल थे।
कार्यप्रणाली और डेटा संग्रह
सेवाक्षेत्र का प्राथमिक डेटा मूल्य (Value) के रूप में प्राप्त होता है, जिसमें मूल्य वृद्धि और वास्तविक उत्पादन दोनों शामिल होते हैं। इसलिए आईएसपी प्राइस डिफ्लेटर का उपयोग करके मुद्रास्फीति के प्रभाव को हटाता है और नाममात्र आय को वास्तविक उत्पादन में परिवर्तित करता है। अलग-अलग उप-क्षेत्रों के लिए अलग मूल्य सूचकांकों का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, थोक व्यापार के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI), जबकि बैंकिंग, बीमा और मरम्मत सेवाओं के लिए सामान्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-General) का उपयोग किया जाता है। जिन क्षेत्रों के लिए अलग सीपीआई उपलब्ध नहीं है, वहां सीपीआई-सेवाएं लागू की जाती है।
कवरेज और डेटा स्रोत
अप्रैल 2026 के परीक्षण सूचकांक में 19 उप-क्षेत्र शामिल किए गए हैं, जो भारत के सेवाक्षेत्र की लगभग 60 प्रतिशत आर्थिक गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें से 14 उप-क्षेत्रों ने अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 में दोहरे अंक (डबल डिजिट) की वृद्धि दर्ज की। आईएसपी के लिए तीन प्रमुख स्रोतों से डेटा लिया जाता है—
- प्रशासनिक अभिलेख, जैसे हवाई परिवहन, रेलवे, बैंकिंग और बीमा।
- वार्षिक निगमित सेवाक्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण (ASISSE), जो निजी स्वास्थ्य और शिक्षा सहित संगठित सेवाक्षेत्र का विस्तृत डेटाबेस तैयार करेगा।
- वस्तु एवं सेवा कर (GST) डेटा, जिसका पहली बार किसी आधिकारिक सांख्यिकीय सूचकांक में प्रत्यक्ष उपयोग किया गया है।
जीएसटी डेटा के माध्यम से खुदरा और थोक व्यापार, होटल एवं भोजन सेवाएं, परिवहन, दूरसंचार, रियल एस्टेट, सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, प्रशासनिक सेवाएं तथा मनोरंजन जैसे क्षेत्रों का उच्च-आवृत्ति विश्लेषण संभव होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवाक्षेत्र का महत्व
भारत में सकल मूल्य वर्धन (GVA) में सेवाक्षेत्र का योगदान 2013-14 से लगातार 50 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है। वर्ष 2024-25 में इसका हिस्सा 52.9 प्रतिशत रहा। रोजगार के क्षेत्र में भी लगभग 30 प्रतिशत लोगों को सेवाक्षेत्र में काम मिलता है, जबकि वर्ष 2020 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में लगभग 4 करोड़ नए रोजगार जुड़े हैं। सेवा निर्यात के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में सेवा निर्यात 103.41 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.16 प्रतिशत अधिक है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक पहुंचाना है।
परीक्षण सूचकांक के प्रमुख निष्कर्ष
अप्रैल 2026 के परीक्षण आंकड़ों के अनुसार सबसे तेज़ वृद्धि आवास एवं खाद्य सेवाओं में 37.2 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद खुदरा व्यापार (30.8 प्रतिशत), प्रशासनिक एवं सहायता सेवाएं (28.7 प्रतिशत), रियल एस्टेट (27.7 प्रतिशत) तथा दूरसंचार (22.8 प्रतिशत) का स्थान रहा। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भी आवास एवं खाद्य सेवाएं सबसे तेज़ बढ़ने वाला उप-क्षेत्र रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि महामारी के बाद उपभोग और पर्यटन गतिविधियों में तेजी से सुधार आया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) भारत का पहला आधिकारिक उच्च-आवृत्ति सूचकांक है, जो विशेष रूप से सेवाक्षेत्र के वास्तविक उत्पादन को मापता है।
- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) भारत में आधिकारिक सांख्यिकीय आंकड़ों के संकलन और प्रकाशन के लिए जिम्मेदार केंद्रीय मंत्रालय है।
- राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) सकल घरेलू उत्पाद (GDP), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) तथा अन्य प्रमुख आर्थिक आंकड़े जारी करता है।
- आईएसपी की कार्यप्रणाली ओईसीडी (OECD) और यूरोस्टैट के अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानकों के अनुरूप विकसित की गई है।
सेवा उत्पादन सूचकांक भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सेवाक्षेत्र की वास्तविक स्थिति का समयबद्ध आकलन उपलब्ध कराएगा, जिससे आर्थिक नीतियों को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकेगा। साथ ही, जीएसटी जैसे उच्च-आवृत्ति डेटा के उपयोग से राष्ट्रीय आय के अनुमान और सकल घरेलू उत्पाद के आकलन की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।